नई दिल्ली, 19 सितम्बर (अशोक “अश्क”) भारतीय वायुसेना अपने लड़ाकू बेड़े में बड़ा बदलाव करने जा रही है। आत्मनिर्भर भारत मिशन 2031 तक पूरी तरह बदलेगा भारतीय वायुसेना का जंगी बेड़ा, 220 तेजस फाइटर जेट होंगे शामिलके तहत वायुसेना ने 2031 तक 220 तेजस लड़ाकू विमान शामिल करने की योजना बनाई है। इनमें 173 सिंगल सीटर तेजस MK-1A और 47 ट्विन सीटर ट्रेनर जेट्स होंगे। यह कदम भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत करने और विदेशी फाइटर जेट्स पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक अहम मील का पत्थर है।

अगस्त 2025 में रक्षा मंत्रालय ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को 97 अतिरिक्त तेजस MK-1A फाइटर्स बनाने की मंजूरी दी थी। ये डील लगभग ₹66,000 करोड़ की है। HAL पहले ही 83 तेजस जेट्स के पहले ऑर्डर पर काम कर रहा है, जिसमें 68 सिंगल सीटर और 15 ट्रेनर जेट शामिल हैं।
LCA तेजस एक हल्का, चौथी पीढ़ी का मल्टीरोल फाइटर जेट है, जो हर मौसम में ऑपरेशन करने में सक्षम है। यह आधुनिक फ्लाई-बाय-वायर सिस्टम, उन्नत ग्लास कॉकपिट, डिजिटल एवियोनिक्स और हल्के मिश्रित मटीरियल से बना है। इसमें ELM-2052 AESA रडार या स्वदेशी उत्तम AESA रडार लगाया जा रहा है।
HAL के चेयरमैन डीके सुनील ने बताया कि मिसाइल फायरिंग के दौरान हथियारों का परीक्षण विमान की परफॉर्मेंस की सबसे बड़ी कसौटी होता है। यह साबित करता है कि विमान का डिज़ाइन, हथियारों की एलाइनमेंट और सिस्टम की विश्वसनीयता पूरी तरह सटीक है।
HAL के अनुसार, जैसे ही ASRAAM और अस्त्र मिसाइलों के परीक्षण पूरे होंगे, अक्टूबर से भारतीय वायुसेना को तेजस की पहली खेप सौंप दी जाएगी। अब तक 10 विमान तैयार हो चुके हैं और 24 की असेंबली जारी है।
पहले ऑर्डर की देरी की वजह इंजन की आपूर्ति में बाधा थी, लेकिन अब अमेरिकी कंपनी GE Aerospace ने आपूर्ति में तेजी लाई है। तीन इंजन पहले ही मिल चुके हैं और दिसंबर तक सात और आ जाएंगे।
तेजस की तुलना पाकिस्तान और चीन द्वारा विकसित JF-17 थंडर से की जाती रही है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि 4.5 जेनरेशन का तेजस तकनीकी और रणनीतिक रूप से काफी बेहतर है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय मिसाइलों ने JF-17 को सफलतापूर्वक टारगेट किया था।
भारतीय वायुसेना की योजना है कि 11 स्क्वॉड्रन तेजस पर आधारित होंगी, जिनमें प्रत्येक में लगभग 20 फाइटर जेट होंगे। ये यूनिट्स मैन-अनमैंड टीमिंग और कॉम्बैट एयर टीमिंग सिस्टम जैसी आधुनिक युद्ध तकनीकों से लैस होंगी।
तेजस की डिलीवरी शुरू होते ही भारत न सिर्फ आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ेगा, बल्कि यह घरेलू रक्षा उद्योग को भी नई ऊंचाई तक ले जाएगा।

