नई दिल्ली, 25 अक्टूबर(अशोक “अश्क”) हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो सिर्फ एक बार नहीं, हर बार देखने पर नए रोमांच का एहसास कराती हैं। ‘दीवानगी’ (2002) ऐसी ही एक फिल्म है, जिसने भारतीय दर्शकों के सामने सस्पेंस थ्रिलर की नई परिभाषा पेश की। इस फिल्म ने यह साबित किया कि कभी-कभी एक आम इंसान की बुद्धिमानी सबसे ताकतवर दुश्मन पर भी भारी पड़ सकती है।

25 अक्टूबर 2002 को रिलीज हुई ‘दीवानगी’ का निर्देशन अनीस बज्मी ने किया था और निर्माण नितिन मनमोहन ने। फिल्म उस साल की 11वीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी थी। इसमें अजय देवगन, अक्षय खन्ना और उर्मिला मातोंडकर ने मुख्य भूमिकाएं निभाईं। अजय देवगन ने तरंग भारद्वाज के रूप में एक ऐसे खलनायक का किरदार निभाया, जिसने दर्शकों के दिलों में डर और सम्मान दोनों पैदा किया। इस दमदार प्रदर्शन के लिए उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ खलनायक पुरस्कार से नवाजा गया।
फिल्म की कहानी राज गोयल (अक्षय खन्ना) नामक वकील के इर्द-गिर्द घूमती है, जो कभी कोई केस नहीं हारता। वह मशहूर गायिका सरगम (उर्मिला मातोंडकर) के कहने पर उसके संगीत गुरु तरंग का केस लड़ता है, जिस पर हत्या का आरोप होता है। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, एक ऐसा सस्पेंस सामने आता है जो दर्शकों को पूरी तरह हिला देता है।
फिल्म का संगीत इस्माइल दरबार ने दिया था, जबकि गीत सलीम बिजनोरी और नुसरत बद्र ने लिखे थे। ‘दीवानगी’ के गाने और बैकग्राउंड स्कोर ने फिल्म के रहस्य को और गहराई दी।
रिलीज के 23 साल पूरे होने पर निर्देशक अनीस बज्मी ने अपने इंस्टाग्राम पर फिल्म का पोस्टर शेयर करते हुए लिखा, “‘दीवानगी’ मेरे दिल के बेहद करीब है। इसने सस्पेंस थ्रिलर को नए अंदाज में पेश किया था। इस खूबसूरत सफर के लिए मैं आभारी हूं।”

