नई दिल्ली, 21 सितम्बर (अशोक “अश्क”) भारत में बहुप्रतीक्षित मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) टेंडर और स्वदेशी तेजस Mk-2 प्रोग्राम को लेकर रूस और फ्रांस के बीच जबरदस्त प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। दोनों देशों ने भारतीय वायुसेना को अत्याधुनिक फाइटर जेट्स और इंजन तकनीक के आकर्षक प्रस्ताव दिए हैं, जो न सिर्फ भारत की हवाई ताकत को बढ़ा सकते हैं, बल्कि दीर्घकालिक रक्षा सहयोग को भी नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं।

रूस ने अपने फिफ्थ जनरेशन फाइटर Su-57E को भारत के लिए राफेल का विकल्प बताते हुए एक बड़ा ऑफर दिया है। पहले प्रस्तावित 60 विमानों की संख्या को बढ़ाकर अब 126 कर दिया गया है। प्रत्येक विमान की कीमत लगभग \$80 मिलियन (करीब 670 करोड़ रुपये) बताई गई है, जो फ्रांसीसी राफेल के मुकाबले सस्ता है।
रूसी ऑफर में शामिल हैं:
टेक्नोलॉजी ट्रांसफर: पूरा सोर्स कोड, 70-80% लोकल उत्पादन (HAL नासिक में निर्माण), भारतीय हथियारों जैसे अस्त्र और रुद्रम का इंटीग्रेशन और निर्यात अधिकार।
तकनीकी विशेषताएं: 5वीं पीढ़ी का स्टील्थ डिज़ाइन, इंटरनल वेपन बे, सुपरमैन्यूवरेबिलिटी, ओपन आर्किटेक्चर, 3500 किमी रेंज, मैक 2 स्पीड और 10 टन पेलोड क्षमता।
फायदे: सस्ती कीमत, अपग्रेड फ्री, Su-30MKI से कम्पैटिबिलिटी और HAL के लिए उत्पादन अवसर।
हालांकि, कुछ कमियां भी हैं। Su-57 की स्टील्थ क्षमता (RCS 0.1-1 m²) अमेरिका के F-35 से कमतर है। इसके इंजन AL-41F1S को अपरिपक्व माना जा रहा है और रूस पर लगे पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण डिलीवरी में देरी की आशंका भी है। इसके अलावा, भारत को वास्तव में “5th जनरेशन” विमान चाहिए, जबकि Su-57 अभी भी कुछ विशेषज्ञों की नजर में “4++” स्तर का है।
इधर फ्रांस ने भी भारत को राफेल F4 वर्जन की पेशकश के साथ एक और बड़ा प्रस्ताव दिया है तेजस Mk-2 के लिए साफ्रान का नया M88-4 इंजन। यह ऑफर भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम को आत्मनिर्भरता की ओर ले जा सकता है।
मुख्य बातें:
राफेल F4 डील: 114 विमानों की सरकार-से-सरकार (G2G) डील, कीमत लगभग \$120 मिलियन प्रति विमान। 60% लोकलाइजेशन, लेकिन अपग्रेड पेड हैं।
तकनीकी विशेषताएं: 4.5 जनरेशन, AESA रडार, मेटियॉर मिसाइल, 3700 किमी रेंज, मैक 1.8 स्पीड, 9.5 टन पेलोड और बेहतर स्टील्थ।
साफ्रान M88-4 इंजन: तेजस Mk-2 के लिए GE F414 का विकल्प। थ्रस्ट 95-105 kN, प्लग-एंड-प्ले डिजाइन, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का वादा। AMCA के 120 kN इंजन के लिए भी साझेदारी संभव।
फ्रांसीसी तकनीक साबित हो चुकी है (राफेल ने 500+ सफल मिशन पूरे किए हैं), फ्रांस के साथ राजनीतिक और सैन्य संबंध मजबूत हैं, और M88 से यूरोपीय बाजारों में निर्यात की संभावना भी बनती है।
लेकिन कीमत ज्यादा, अपग्रेड्स महंगे और 100% टेक्नोलॉजी ट्रांसफर संभव नहीं। M88-4 का विकास अभी 2-3 साल ले सकता है, जिससे तेजस Mk-2 की टाइमलाइन प्रभावित हो सकती है।
अगर भारत को लागत प्रभावी 5th जनरेशन विकल्प और ज्यादा रणनीतिक स्वतंत्रता चाहिए, तो रूसी Su-57E आकर्षक विकल्प है। लेकिन इसकी स्टील्थ क्षमता और इंजन पर अभी सवाल हैं, और रूस की विश्वसनीयता भी यूक्रेन युद्ध के चलते चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है।
दूसरी ओर, फ्रांस का ऑफर ज्यादा विश्वसनीय है। राफेल पहले से IAF का हिस्सा है और M88-4 इंजन से तेजस Mk-2 के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम होगा।
भारत के पास दो विकल्प हैं रूस का सस्ता लेकिन जोखिमपूर्ण Su-57 पैकेज, या फ्रांस का महंगा लेकिन भरोसेमंद राफेल + M88 प्रस्ताव। अंतिम फैसला रक्षा मंत्रालय का होगा, लेकिन फैसला आत्मनिर्भरता, लागत, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और दीर्घकालिक रणनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।

