
पटना, 20 जनवरी (पटना डेस्क) बिहार में कांग्रेस संगठन को मजबूत करने की कवायद में पूरी ताकत झोंकती नजर आ रही है। सोमवार को पटना गर्ल्स हॉस्टल में कथित हैवानियत मामले को लेकर कांग्रेस ने सुबह सड़क पर उतरकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में कांग्रेस के बिहार प्रभारी की मौजूदगी ने सियासी संदेश साफ कर दिया।

घटना के नौ दिन बाद आरजेडी के बिना कांग्रेस का अकेले सड़क पर उतरना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। माना जा रहा है कि कांग्रेस अब बिहार में अपने दम पर जनाधार मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।इसी बीच कांग्रेस में अंदरूनी कलह की खबरों ने सियासत को और गरमा दिया है। पार्टी से नाराज चल रहे सभी छह कांग्रेस विधायकों को दिल्ली तलब किया गया है। पार्टी नेतृत्व ने टूट की आशंका को गंभीरता से लेते हुए यह कदम उठाया है। 23 जनवरी को दिल्ली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विधायकों से बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश करेंगे।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में कांग्रेस को महज छह सीटों पर जीत मिली थी, लेकिन जीत के बाद ही सभी विधायक पार्टी से विद्रोह के मूड में बताए जा रहे हैं। अगर ये विधायक अलग हुए तो कांग्रेस बिहार विधानसभा में शून्य पर पहुंच जाएगी, जो पार्टी के लिए बड़ा झटका होगा।संगठन को बचाने और राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए कांग्रेस अब एक साथ दो मोर्चों पर लड़ाई लड़ती दिख रही है—एक तरफ सड़क पर सरकार के खिलाफ आंदोलन और दूसरी तरफ दिल्ली में पार्टी को टूट से बचाने की कोशिश। आने वाले दिन बिहार की राजनीति के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।

