
पूर्णिया, 25 जनवरी (राजेश कुमार झा) देश में डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है.लेकिन अभी तक इससे बचने के उपाय के बारे में सरकार ने कोई खास रणनीति नहीं बना पाई है. जिसकी वजह से आए दिन लोग इस डिजिटल ठगी का शिकार बनते जा रहे है.सबसे बड़ी बात ये है कि पढ़े-लिखे, अनुभवी और वरिष्ठ नागरिक भी ऐसे जालसाजों के झांसे में आकर उनकी हर बात मान लेते है.जो कि एक बेहद चौंकाने वाला है.

सबसे बड़ी आश्चर्य है कि इस तरह के जालसाज लोगों से इस तरह का व्यवहार करते है कि लोग अपनी समझ खो बैठते है.और पूरी तरह उनके झांसे में आ जाते है.जिले में डिजिटल अरेस्ट का सबसे बड़ा मामला कसबा थानाक्षेत्र में एक रिटायर्ड शिक्षक के साथ हुआ है.जिनसे तकरीबन 35 लाख की ठगी की गई.सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डिजिटल अरेस्ट मामलों में आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल का डर दिखाते हुए नशीले पदार्थों की तस्करी, आतंकवाद वित्तपोषण की बात बताकर उनके अकाउंट में टेरर फंडिंग की बात बताकर आरोपियों की जांच के बहाने उन्हें उनके ही घर में डिजिटल अरेस्ट की धमकी देते है.

फिलहाल ये मामला राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज होने के बाद,ये मामला “इंटेलीजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रेटजिक ऑपरेशन्स” इकाई को दिया गया है.इसलिए अगर आपको ऐसी कोई भी कॉल आपके पास आती है तो बिल्कुल भी नहीं घबराएं और कोई भी जल्दीबाजी नहीं करें.अगर आपके पास ऐसी कोई भी कॉल आए तो सबसे पहले धैर्य रखें और नजदीक के पुलिस स्टेशन या साइबर अपराध इकाई को अविलंब सूचित करें.समझदारी ही बचाव है.

