
पटना, 10 फरवरी (अविनाश कुमार) बिहार विधानसभा के प्रश्नकाल में सोमवार को गोपालगंज जिले से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला जोरदार तरीके से उठा, जिसने सदन से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक हलचल मचा दी। बैकुंठपुर के विधायक मिथिलेश तिवारी ने आरोप लगाया कि वर्ष 1990 से 2015 के बीच बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक धार्मिक वीजा पर भारत आए और बाद में गोपालगंज में स्थायी रूप से बस गए।विधायक ने सदन में दावा किया कि 1995 से 2015 के बीच कुल 173 विदेशी नागरिक धार्मिक यात्रा के उद्देश्य से जिले में पहुंचे थे, लेकिन समय बीतने के साथ वे यहीं के होकर रह गए।

उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इनमें से कई लोगों ने आधार कार्ड, वोटर आईडी जैसे स्थानीय पहचान पत्र भी बनवा लिए हैं और कुछ ने तो आलीशान मकान तक खड़े कर लिए हैं। मिथिलेश तिवारी ने कहा कि थावे मंदिर को छोड़ दें तो जिले में कोई बड़ा धार्मिक केंद्र नहीं है, इसके बावजूद विदेशी तीर्थयात्रियों की संख्या असामान्य रूप से अधिक दर्ज की गई, जो संदेह पैदा करती है।उन्होंने सरकार से सवाल किया कि इन विदेशी नागरिकों की निगरानी के लिए क्या व्यवस्था की गई और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है। इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग भी उन्होंने सदन में रखी।जवाब में डिप्टी सीएम सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है। उन्होंने बताया कि 173 में से लगभग 168 लोग पाकिस्तान से आए थे, जबकि कुछ नागरिक ब्रिटेन और कजाकिस्तान से भी संबंधित बताए गए हैं।

गृह मंत्री ने आश्वासन दिया कि धार्मिक वीजा पर आए हर व्यक्ति के ठहराव, गतिविधियों और दस्तावेजों की समीक्षा की जाएगी।आधार और वोटर कार्ड बनाए जाने के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी तरह की अनियमितता पाई गई तो सत्यापन के बाद सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार केंद्र के दिशा-निर्देशों के अनुसार आवश्यक कदम उठाएगी।

