
नई दिल्ली, 10 फरवरी (अशोक “अश्क”) जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर भारत द्वारा शुरू किए गए सावलकोट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट ने पाकिस्तान की नींद उड़ा दी है। करीब 5,129 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को लेकर पाकिस्तान ने औपचारिक समीक्षा प्रक्रिया शुरू कर दी है। पाकिस्तान के जल संसाधन मंत्रालय के शीर्ष सूत्रों के हवाले से बताया है कि इस डैम को देश की खेती और सिंचाई व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है।

बताया जाता है कि मोदी सरकार ने सिंधु जल संधि को सस्पेंड करने के बाद इस परियोजना को हरी झंडी दी थी। इसके बाद भारत ने चिनाब नदी पर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को तेज रफ्तार देने का फैसला किया। रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार ने पाकल दुल और किरू प्रोजेक्ट्स को दिसंबर 2026 तक चालू करने के निर्देश दिए हैं, जबकि मार्च 2028 तक क्वार प्रोजेक्ट पूरा करने और रणनीतिक रूप से अहम रतले डैम पर युद्धस्तर पर काम शुरू करने को कहा गया है।

संधि सस्पेंड होने के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ डेटा शेयरिंग और पूर्व सूचना देने की बाध्यता भी खत्म कर दी है। भारत ने कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसलों को गैर-कानूनी बताते हुए खारिज कर दिया है। इससे पाकिस्तान की चिंता और बढ़ गई है।चिनाब नदी पाकिस्तान के लिए लाइफलाइन मानी जाती है। देश का लगभग 90 प्रतिशत कृषि क्षेत्र इसी जल प्रणाली पर निर्भर है। खुफिया सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान के कई विभाग इस प्रोजेक्ट का अध्ययन कर रहे हैं और जल्द ही एक संयुक्त रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय को सौंपी जाएगी। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को चुनौती देने की तैयारी में जुटा है, जबकि भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस पर जवाब देने की बात कही है।

