पटना (अशोक “अश्क”) हर साल भारत से हजारों छात्र ‘अमेरिकन ड्रीम’ को सच करने के लिए अमेरिका का रुख करते हैं। उम्मीद होती है कि एक बेहतरीन डिग्री, फिर अच्छी नौकरी और एक आरामदायक जीवन मिलेगा। इसके लिए छात्र और उनके परिवार लाखों रुपये खर्च कर देते हैं, कई बार तो बड़े एजुकेशन लोन भी ले लेते हैं। लेकिन इस सपने की हकीकत अक्सर बहुत कड़वी निकलती है।

हाल ही में एक भारतीय मूल की टेक वर्कर ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर की, जिसमें उन्होंने अपने एक जानने वाले छात्र की कहानी बताई। उस छात्र ने अमेरिका में ग्रेजुएशन के लिए 50 लाख रुपये का लोन लिया था। पढ़ाई पूरी करने के बाद उम्मीद थी कि कोई अच्छी जॉब मिल जाएगी, लेकिन अफसोस कि एक भी जॉब ऑफर नहीं मिला। आखिरकार, उसे बिना नौकरी के भारत लौटना पड़ा और अब वह मुंबई में एक कम सैलरी वाली नौकरी कर रहा है। उसके पिता अब उस भारी-भरकम एजुकेशन लोन को चुकाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
पोस्ट में महिला ने लिखा, “यह ऐसी कहानी है जिसे यूनिवर्सिटीज नहीं चाहतीं कि आप जानें। मेरे दोस्त का भाई हाल ही में अमेरिका से ग्रेजुएट हुआ। उसने पढ़ाई पर लाखों रुपये खर्च किए, उसके ऊपर 50 लाख का कर्ज है और आज उसके पास कोई नौकरी नहीं है।”
टेक वर्कर ने यह भी बताया कि पहले जहां साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स से ग्रेजुएट छात्रों को आसानी से नौकरी मिल जाती थी, अब वैसा नहीं रहा। जॉब मार्केट लगातार बदल रहा है और प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है।
उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि एजुकेशन लोन लेने से पहले सभी पहलुओं को अच्छी तरह समझें। यह जानना जरूरी है कि भविष्य में आप उस लोन को कैसे चुकाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने नई-नई स्किल्स सीखने और खुद को लगातार अपग्रेड करते रहने पर जोर दिया।
यह कहानी न केवल एक छात्र की विफलता की कहानी है, बल्कि उन हजारों छात्रों के लिए एक चेतावनी है जो बिना तैयारी के सिर्फ सपनों के पीछे भागते हैं। अमेरिकन ड्रीम तभी सच हो सकता है जब उसके पीछे मजबूत योजना और सच्चाई की समझ हो।

