
पटना, 19 फरवरी (अविनाश कुमार) देशभर की 37 सीटों के साथ बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर 16 मार्च को होने वाले चुनाव ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। चुनाव की घोषणा के बाद से ही सबकी नजरें 243 सदस्यीय विधानसभा में विधायकों की संख्या पर टिक गई हैं। चौथी सीट का गणित लगभग साफ माना जा रहा है, लेकिन पांचवीं सीट पर मुकाबले की आहट ने सत्ता और विपक्ष दोनों खेमों में हलचल तेज कर दी है। नोटिफिकेशन के अनुसार 26 फरवरी से नामांकन शुरू होगा, 5 मार्च आखिरी तारीख है और 9 मार्च तक नाम वापसी संभव है।

य दि उम्मीदवार अधिक हुए तो 16 मार्च को मतदान होगा, अन्यथा निर्विरोध निर्वाचन भी हो सकता है। एक उम्मीदवार को जीत के लिए 41 विधायकों का समर्थन चाहिए।सत्ताधारी NDA के पास 202 विधायक हैं। इनमें भारतीय जनता पार्टी के 89, जनता दल (यूनाइटेड) के 85, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 19, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के 5 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के 4 विधायक शामिल हैं। चार सीटें जीतने के बाद भी NDA के पास 38 वोट बचेंगे, लेकिन पांचवीं सीट के लिए उसे कम से कम तीन अतिरिक्त समर्थन की दरकार होगी।वहीं विपक्षी महागठबंधन की अगुवाई राष्ट्रीय जनता दल कर रहा है।

उसके साथ कांग्रेस और वाम दलों के विधायक हैं। यदि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के 5 और बहुजन समाज पार्टी के 1 विधायक साथ आते हैं तो आंकड़ा 41 तक पहुंच सकता है। ऐसे में AIMIM की भूमिका निर्णायक बन सकती है। पांचवीं सीट पर अब सियासी शतरंज की बिसात बिछ चुकी है।

