
नई दिल्ली, 20 जनवरी (अशोक “अश्क”) देश को एक छोर से दूसरे छोर तक जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी भारत माला परियोजना की रफ्तार पर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब साढ़े चार हजार किलोमीटर सड़कों का निर्माण अब भी अधूरा है, जबकि पहला चरण पूरा घोषित किया जा चुका है। केंद्र सरकार की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक राज्यों को सौंपे गए कई मार्ग अब तक पूरे नहीं हो पाए हैं।परियोजना के तहत 2017 में पहले चरण में 34,800 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए 5.35 लाख करोड़ रुपये का अनुमान लगाया गया था। कुल 26,425 किलोमीटर मार्ग परियोजनाएं आवंटित की गईं, जिनमें से दिसंबर 2025 तक 21,783 किलोमीटर ही पूरे हो सके।

31 जनवरी 2026 तक इस योजना पर 5,30,758.24 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।राज्यों के प्रदर्शन की बात करें तो केवल Goa ने ही सौंपा गया काम पूरी तरह पूरा किया है। जबकि Tripura, Assam, Delhi, Himachal Pradesh और Jammu and Kashmir ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन लक्ष्य से पीछे रहे। अन्य राज्यों में काम आंशिक रूप से लंबित है।केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री Nitin Gadkari के अनुसार फिलहाल नई परियोजनाओं की मंजूरी रोक दी गई है।

परियोजना का मूल्यांकन Indian Institute of Management Bangalore से कराया गया है। नए प्रावधान के तहत अधूरे राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे पर पूरी लंबाई का टोल नहीं वसूला जाएगा, बल्कि राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम 2008 के तहत कम दर से शुल्क लिया जाएगा।

