नई दिल्ली (अशोक “अश्क”) अमेरिका के मिनियापोलिस शहर में बुधवार सुबह एक कैथोलिक स्कूल पर हुए भयानक हमले से पूरे देश में सनसनी फैल गई है। बच्चों के प्रार्थना सत्र के दौरान हुए इस नरसंहार में दो बच्चों की मौत हो गई, जबकि 17 अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। हमले को अंजाम देने वाले 23 वर्षीय रॉबिन वेस्टमैन की लाश स्कूल के बाहर पार्किंग में मिली है। अधिकारियों का मानना है कि उसने आत्महत्या कर ली।

घटना के बाद सामने आए चौंकाने वाले तथ्यों ने इस हमले को केवल एक आम गोलीबारी नहीं रहने दिया। वेस्टमैन के हथियारों पर ‘भारत पर परमाणु बम गिराओ’, ‘माशाअल्लाह’ और ‘इजरायल को खत्म कर दो’ जैसे उकसावे वाले और कट्टरपंथी विचारधारा से प्रेरित संदेश लिखे मिले हैं। इसके अलावा, हथियारों पर पूर्व स्कूल शूटरों के नाम भी दर्ज थे, जो उसके हिंसक मंशा और मानसिकता को दर्शाते हैं।
शूटर वेस्टमैन एक ट्रांसजेंडर था, और प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वह डोनाल्ड ट्रंप की हालिया नीतियों से बेहद आक्रोशित था, जिसमें ट्रांसजेंडर अधिकारों को सीमित किया गया था। इस संदर्भ में उसके हथियारों और मैगजीनों पर लिखे गए संदेश बताते हैं कि उसका गुस्सा राजनीतिक, धार्मिक और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से प्रेरित था।
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में वेस्टमैन को हथियारों के जखीरे के साथ देखा गया है। वीडियो में वह एक राइफल, एक शॉटगन और एक पिस्टल दिखाता है और कहता है, “यह छोटा हथियार मेरे लिए है, अगर जरूरत पड़ी।” यह वीडियो उसके नाम से चल रहे यूट्यूब चैनल पर पोस्ट किया गया था, जिसे घटना के बाद हटा दिया गया है।
वीडियो में वेस्टमैन ने दो जर्नल्स का भी उल्लेख किया है—एक 60 पन्नों का और दूसरा 150 पन्नों का—जो पूरी तरह सिरिलिक भाषा में लिखे गए थे। इन दस्तावेजों से उसकी हिंसक विचारधारा और योजनाबद्ध हमले की पुष्टि होती है। जांचकर्ता इस संभावना को भी खारिज नहीं कर रहे हैं कि वह किसी कट्टरपंथी संगठन या जिहादी तत्वों के संपर्क में आया हो सकता है।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वेस्टमैन ने हमले से पहले एक चिट्ठी भी रिकॉर्ड की थी, जिसमें उसने अपने परिवार से इस भयावह कृत्य के लिए माफी मांगी थी और कहा था कि वह जानता है कि उनका जीवन अब कभी सामान्य नहीं रहेगा।
यूएस डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने इस हमले को “अकल्पनीय स्तर की हिंसा” बताया है। उन्होंने कहा कि स्कूलों की सुरक्षा को लेकर तत्काल नई रणनीतियां अपनाने की जरूरत है।
यह हमला 2025 में अब तक स्कूलों पर हुआ 146वां हमला है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह महज एक मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति की हरकत नहीं, बल्कि अमेरिकी समाज में फैल रही वैचारिक कट्टरता और नफरत का नतीजा है। हथियारों पर लिखे गए नफरती संदेश यह दर्शाते हैं कि यह हमला एक गहरे वैचारिक जहर से प्रेरित था, जिसका असर अब बच्चों की जिंदगी पर पड़ रहा है।
इस घटना ने न सिर्फ अमेरिका को, बल्कि पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। भारत और इजरायल को लेकर शूटर की कट्टर सोच से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भी चिंता बढ़ी है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतने घातक विचार एक युवा के मन में क्यों और कैसे पनपते हैं — और क्या समाज इस कट्टरता से निपटने के लिए तैयार है?

