
बिहार डेस्क,पटना। बिहार पुलिस महकमे में इन दिनों प्रमोशन को लेकर एक ऐसी विसंगति चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसने विभागीय व्यवस्था और वरिष्ठता प्रणाली दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हैरानी की बात यह है कि वर्ष 2009 बैच के 422 दारोगा, जिन्होंने करीब 17 वर्षों तक सेवा दी, आज भी इंस्पेक्टर बनने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जबकि दिसंबर 2017 में बहाल हुए कई जूनियर पुलिस अधिकारियों को इंस्पेक्टर का उच्चतर प्रभार मिल चुका है।
पुलिस विभाग के गलियारों में इसे “प्रमोशन का अजब खेल” कहा जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह स्थिति न केवल अनुभवी पुलिसकर्मियों के मनोबल को तोड़ रही है, बल्कि विभागीय अनुशासन और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर रही है।
दरअसल,पूरा मामला ट्रेनिंग के बाद आयोजित होने वाली परीक्षा के अंकों और वरीयता सूची में हुए फेरबदल से जुड़ा बताया जा रहा है। इसी गड़बड़ी के कारण कई वरिष्ठ अधिकारियों की रैंकिंग नीचे चली गई और जूनियर अफसर उनसे आगे निकल गए। खास बात यह है कि पुलिस मुख्यालय द्वारा वर्ष 2023 में जारी वरीयता सूची में भी इन 422 अधिकारियों की वरिष्ठता स्पष्ट रूप से दर्ज है, बावजूद इसके उनकी प्रोन्नति की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है। विभागीय सूत्रों के अनुसार बिहार पुलिस में इंस्पेक्टर स्तर के 1168 पद रिक्त हैं, लेकिन विभागीय जांच, अदालती मामलों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का हवाला देकर प्रमोशन की फाइलें लंबे समय से लंबित रखी गई हैं। इससे नाराज कई वरिष्ठ दारोगाओं ने अब न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। साथ ही उन्होंने डीजीपी और एडीजी को पत्र लिखकर अपनी पीड़ा और नाराजगी जाहिर की है।
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद अब इन अधिकारियों की उम्मीदें नई सरकार से जुड़ गई हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार से यह अपेक्षा की जा रही है कि वर्षों से लंबित इस विवाद का समाधान निकाला जाएगा। विभागीय चर्चाओं के मुताबिक जल्द ही करीब 200 इंस्पेक्टरों को डीएसपी पद पर प्रोन्नति दी जा सकती है। यदि ऐसा होता है तो खाली होने वाले पदों पर लंबे समय से प्रतीक्षारत वरिष्ठ दारोगाओं को प्रमोशन मिलने का रास्ता साफ हो सकता है। अब सबकी नजर नई सरकार के फैसले पर टिकी है कि आखिर कब तक इन अनुभवी पुलिस अधिकारियों को उनका वाजिब हक मिल पाता है।

