
पटना, 10 मार्च (अविनाश कुमार) बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। खासकर पांचवीं सीट के लिए मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। इस सीट का गणित अब छोटी पार्टियों के विधायकों पर टिक गया है। AIMIM और बहुजन समाज पार्टी के कुल छह विधायक इस चुनाव में किंगमेकर की भूमिका निभा सकते हैं।इसी बीच AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने महागठबंधन के सामने समर्थन के लिए बड़ी शर्त रख दी है।

एक मीडिया बातचीत में उन्होंने कहा कि नामांकन से पहले उनकी तेजस्वी यादव से बातचीत हुई थी, जिसमें उन्होंने अपनी पार्टी की दावेदारी भी रखी थी। उस समय तेजस्वी यादव ने दिल्ली से लौटने के बाद चर्चा करने की बात कही थी, लेकिन बाद में बिना किसी सलाह-मशविरा के ही उम्मीदवार का नामांकन कर दिया गया।अख्तरुल ईमान ने कहा कि अगर महागठबंधन को AIMIM के वोट चाहिए तो उनकी पार्टी की मर्यादा का सम्मान करना होगा। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “हम कब तक सेक्युलरिज्म के नाम पर दूसरों का कंधा बनते रहेंगे?” उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक किसी भी गठबंधन नेता ने समर्थन के लिए उनसे संपर्क नहीं किया है।

राजनीतिक समीकरणों में AIMIM के पांच विधायक अहम भूमिका निभा सकते हैं। अख्तरुल ईमान ने साफ संकेत दिया है कि उनकी पार्टी का समर्थन मुफ्त में नहीं मिलेगा। उनका कहना है कि राजनीति में “गिव एंड टेक” जरूरी होता है।उन्होंने शर्त रखते हुए कहा कि अगर AIMIM राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन के उम्मीदवार का समर्थन करती है, तो बदले में विधान परिषद की खाली होने वाली एक सीट पर उनकी पार्टी को समर्थन दिया जाना चाहिए।राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि AIMIM अपने करीबी नेता और पार्टी प्रवक्ता आदिल को विधान परिषद भेजना चाहती है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या तेजस्वी यादव AIMIM की इस शर्त को मानते हैं या फिर राज्यसभा की पांचवीं सीट का मुकाबला और ज्यादा रोमांचक हो जाएगा।

