भोपाल 29 अगस्त (अशोक “अश्क”) मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण देने को लेकर सभी राजनीतिक दल एकमत हो गए हैं। इस महत्वपूर्ण मसले पर गुरुवार को भोपाल स्थित मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित सर्वदलीय बैठक में राजनीतिक दलों ने एक साझा संकल्प पारित किया। भाजपा, कांग्रेस समेत सभी दलों ने विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका तीनों स्तरों पर मिलकर आरक्षण के समर्थन में प्रयास करने की प्रतिबद्धता जताई।

बैठक के दौरान यह भी तय किया गया कि 10 सितंबर से पहले सभी दलों के वकील एक साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई के लिए रणनीति बनाएंगे। सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी आरक्षण पर नियमित सुनवाई 23 सितंबर से शुरू होने जा रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैठक के बाद कहा, “राज्य में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देना हमारी प्राथमिकता है। फिलहाल 27 में से 13 प्रतिशत पद हाई कोर्ट के आदेश के कारण होल्ड पर हैं। हम चाहते हैं कि इन पदों पर भी जल्द से जल्द ओबीसी आरक्षण का लाभ मिले।”
हालांकि कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने इस बैठक पर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “सर्वदलीय बैठक बुलाना जनता को गुमराह करने का षड्यंत्र है। कांग्रेस सरकार ने पहले ही 27 प्रतिशत आरक्षण लागू कर दिया था, तो अब यह बैठक क्यों?”
गौरतलब है कि मार्च 2019 में कमल नाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया था। लेकिन आरक्षण की कुल सीमा 50 प्रतिशत से अधिक हो जाने के कारण मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी।
सितंबर 2021 में राज्य सरकार ने महाधिवक्ता के अभिमत पर 27 प्रतिशत आरक्षण देने की अनुमति दी। हालांकि, हाई कोर्ट ने अगस्त 2023 में निर्देश दिया कि 27 में से 13 प्रतिशत पद फिलहाल होल्ड पर रखे जाएं।
इसके बाद फरवरी 2025 में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मामले को उच्चतम न्यायालय के विचारार्थ प्रस्तुत किया है। अब सभी की नजरें 23 सितंबर से शुरू हो रही सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी वर्ष में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर से सियासत के केंद्र में आ गया है और सभी दल इस संवेदनशील विषय पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने में जुटे हैं।

