
गोपालगंज,टीएन मिश्रा। जिले में एक फौजी ने तंबाकू के खिलाफ जंग की शुरूआत की है। वे अस्पताल में इलाज कराने आने वालों को मरीजों को नशा मुक्ति का संदेश दे रहें है। बता दें कि अक्सर लोग अपनी नौकरी को केवल जिम्मेदारी मानकर निभाते हैं,लेकिन थावे प्रखंड के बरारी जगदीश गांव निवासी सिकंदर बैठा के लिए ड्यूटी एक मिशन बन चुकी है। भारतीय सेना से 2022 में नायक पद से रिटायर हुए सिकंदर आज एक अस्पताल में गार्ड के तौर पर तैनात हैं,मगर उनका असली परिचय है,तंबाकू और नशा मुक्ति के सिपाही का। अस्पताल के गेट पर खड़े रहना उनकी ड्यूटी का हिस्सा जरूर है, लेकिन वे खुद को सिर्फ चौकीदार तक सीमित नहीं रखते। उनकी नजर अस्पताल के हर कोने पर रहती है। कोई खैनी मलता दिख जाए या तंबाकू का सेवन करता नजर आए, तो वे तुरंत पहुंच जाते हैं। दिलचस्प बात यह है कि उन्हें देखते ही लोग खैनी की पुड़िया छिपाने लगते हैं या वहां से खिसक लेते हैं। सिकंदर बैठा का असर ऐसा है कि मरीजों के परिजन ही नहीं, बल्कि अस्पताल के कर्मचारी भी उनसे बचकर नहीं निकल पाते। वे सभी को समान रूप से टोकते हैं। कभी सख्ती से,तो कभी समझाकर। शक होने पर वे जेब और पैकेट तक चेक कर लेते हैं, लेकिन उनकी मंशा हमेशा सुधार की होती है,न कि अपमान की। उनकी इस मुहिम का तरीका भी अलग है। वे डांट-फटकार के बजाय लोगों को तंबाकू के नुकसान समझाते हैं और अपने अनुभव साझा करते हैं। यही वजह है कि अब तक वे सैकड़ों लोगों को खैनी की आदत छोड़ने के लिए प्रेरित कर चुके हैं। शुरुआत में विरोध और नाराजगी भी झेलनी पड़ी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आज हालात यह हैं कि लोग उनके जज्बे के कायल हो चुके हैं। इस अभियान के पीछे एक भावुक कहानी भी छिपी है। सिकंदर बताते हैं कि उन्होंने अपने करीबी दोस्त के पिता को खैनी की लत के कारण कैंसर से तड़प-तड़प कर दम तोड़ते देखा था। उस घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया। तभी उन्होंने ठान लिया कि वे जितना हो सके, लोगों को इस जानलेवा आदत से दूर करेंगे। अस्पताल के स्टाफ और मरीजों के परिजन भी उनकी सराहना करते नहीं थकते। लोगों का कहना है कि अगर हर विभाग में ऐसा एक अनुशासित और संवेदनशील व्यक्ति हो, तो समाज की कई बुराइयों पर काबू पाया जा सकता है। आज यह अस्पताल न सिर्फ इलाज के लिए, बल्कि तंबाकू मुक्ति के मॉडल के रूप में भी चर्चा में है। सिकंदर बैठा कहते हैं,“कैंसर सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं,पूरे परिवार को खत्म कर देता है। अगर मेरी कोशिश से एक भी व्यक्ति तंबाकू छोड़ देता है,तो मैं अपनी मेहनत सफल मानूंगा ।
