नई दिल्ली 29 अगस्त (अशोक “अश्क”) सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा गुजरात हाई कोर्ट के जज जस्टिस संदीप भट्ट का मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में तबादला किए जाने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस फैसले से नाराज गुजरात हाई कोर्ट के वकीलों ने न सिर्फ विरोध जताया है, बल्कि कामकाज भी ठप कर दिया है। अब एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई और भावी सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत से मुलाकात कर इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है।

गुजरात हाई कोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष ब्रिजेश जे. त्रिवेदी के नेतृत्व में एक समिति बनाई गई है, जिसमें वरिष्ठ अधिवक्ता असीम पंड्या, हार्दिक ब्रह्मभट्ट, बाबूभाई मंगुकिया, दीपेन दवे और भार्गव भट्ट शामिल हैं। इस समिति ने नई दिल्ली में सीजेआई और वरिष्ठ जज से मिलकर ज्ञापन सौंपा और जस्टिस भट्ट के स्थानांतरण को न्यायिक प्रक्रिया और न्यायाधीश की प्रतिष्ठा के खिलाफ बताया।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, वकीलों ने कॉलेजियम से अपील की है कि जस्टिस संदीप भट्ट का कार्यकाल अभी सिर्फ चार साल का हुआ है, लेकिन इस दौरान उन्होंने करीब 19,000 मामलों का निपटारा किया है। ज्ञापन में लिखा गया है कि यह आंकड़ा उनकी कड़ी मेहनत, निष्पक्षता और न्यायिक कार्यशैली को दर्शाता है, जो न्यायिक सेवा में उनकी निष्ठा का प्रमाण है।
वकीलों के प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आरोप लगाया कि जस्टिस भट्ट का तबादला, हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुनीता अग्रवाल की प्रशासनिक कार्यप्रणाली के खिलाफ उनके न्यायिक आदेशों का परिणाम हो सकता है। वकीलों ने कहा कि जस्टिस भट्ट ने कभी भी न्यायिक “लक्ष्मण रेखा” का उल्लंघन नहीं किया और हमेशा ऊंचे मानदंड बनाए रखे।
ज्ञापन में यह भी तर्क दिया गया कि हाई कोर्ट के न्यायाधीशों का तबादला सामान्य नहीं माना जाना चाहिए और इस तरह का तबादला जस्टिस भट्ट की प्रतिष्ठा के साथ-साथ न्याय प्रणाली की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़ा कर सकता है।
जस्टिस संदीप भट्ट का करियर 1993 में राजकोट जिला न्यायालय से शुरू हुआ था। उन्होंने 1994 से गुजरात हाई कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की और अक्टूबर 2021 में उन्हें हाई कोर्ट का जज नियुक्त किया गया। 25 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उनका तबादला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट कर दिया, जिससे यह पूरा विवाद खड़ा हो गया है।

