
पूर्णिया:-25 जून(राजेश कुमार झा)देश के कई राज्यों के कोचिंग संस्थानों में आग से हुए भयंकर हादसे को लेकर छात्रों और अभिभावकों में इतना डर बैठ गया है कि न जाने कब और कहां क्या हादसा सुनने को मिल जाय.बताते चलें कि हाल ही में लखनऊ के एक इंस्टीच्यूट में आग से हुए भयंकर हादसे ने देश में चल रहे कोचिंग संस्थानों पर कई तरह के सवालिया निशान खड़ा कर दिया है.इसको लेकर बिफोरप्रिंट डिजिटल ने पूर्णिया शहर के 10 बड़े कोचिंग संस्थानों में पढ़ रहे छात्रों से मुलाकात कर सुरक्षा को लेकर कई तरह के सवाल किए.सुरक्षा को लेकर सभी बड़े-बड़े कोचिंग संस्थानों के छात्रों ने अपनी अलग-अलग राय दी.लेकिन छात्रों के जबाब में कॉन्फिडेंस की थोड़ी कमी दिखी.छात्रों ने बताया कि हमलोग हर दिन कोचिंग में तकरीबन तीन से चार घंटे देते है.कभी-कभी तो 8-8 घंटों तक हमलोगों को कोचिंग में रहना पड़ता है.छात्रों ने बताया कि फायर को लेकर बताया कि फायर सेफ्टी डिवाइस तो है.लेकिन कोचिंग के बाहर बहुत सारे उलझे-उलझे बिजली के तार है.जिनसे हमेशा एक डर बना रहता है कि पता नहीं ये तार कब टूट जाय.दूसरे कोचिंग के छात्रों ने बताया कि आने-जाने के लिए एक ही गेट होने की वजह से ऐसी स्थिति में भगदड़ होने की संभावना बन सकती है.छात्रों ने बताया कि हमलोगों के कोचिंग के अंदर में किचन की व्यवस्था है. हालांकि फायर सेफ्टी का ध्यान पूरी तरह रखा जाता है. लेकिन मेरी राय में किचन कोचिंग के अंदर नहीं होनी चाहिये.फिलहाल ये सब देखना शिक्षा विभाग का काम है कि सुरक्षा मानकों में कौन-कौन से कोचिंग संस्थान सही है.

