
पटना:-07 जुलाई(राजेश कुमार झा)बिहार में बांकीपुर विधानसभा कई मायनों में काफी चर्चित रहा.बांकीपुर विधानसभा सीट से विजयी उम्मीदवार भाजपा के नितिन नवीन का भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना,पूरे देश में एक बड़ा मैसेज गया है.दूसरी तरफ जनसुराज के सूत्रधार होने के नाते प्रशांत किशोर का बांकीपुर सीट से खड़ा होना भी बाकीपुर को और अधिक चर्चा में खड़ा कर दिया है.अब सवाल ये उठता है कि प्रशांत किशोर इस सीट को जीतने के लिए अपनी प्रतिष्ठा दावं पर क्यों लगा दी है.बताते चलें कि जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में खुद चुनाव लड़ने का फैसला कई राजनीतिक कारणों से किया है:
राजनीतिक पहचान मजबूत करने की कोशिश – 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जनसुराज को कोई सीट नहीं मिली थी.ऐसे में प्रशांत किशोर पहली बार सीधे चुनावी मैदान में उतरकर अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता साबित करना चाहते हैं.
भाजपा के गढ़ में चुनौती-
बांकीपुर सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती है.यह सीट भाजपा नेता नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई है. प्रशांत किशोर का मानना है कि यहां मजबूत लड़ाई लड़कर वे खुद को प्रमुख विपक्षी चेहरे के रूप में स्थापित कर सकते हैं.
RJD-कांग्रेस से आगे निकलने की रणनीति-
प्रशांत किशोर ने दावा किया है कि बांकीपुर में भाजपा को चुनौती देने की क्षमता जनसुराज के पास है.इससे वे विपक्षी राजनीति में खुद को RJD और कांग्रेस से अधिक प्रभावी विकल्प के रूप में पेश करना चाहते हैं.
‘मेक ऑर ब्रेक’ चुनाव-
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह उपचुनाव प्रशांत किशोर के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई है.जीत तो बड़ी उपलब्धि होगी,लेकिन भाजपा के खिलाफ मजबूत प्रदर्शन या दूसरे स्थान पर आना भी उनके राजनीतिक भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
संक्षेप में, प्रशांत किशोर ने बांकीपुर को इसलिए चुना है क्योंकि यह बिहार की सबसे चर्चित शहरी सीटों में से एक है और यहां अच्छा प्रदर्शन उन्हें बिहार की राजनीति में एक मजबूत जनाधार वाले नेता के रूप में स्थापित कर सकता है.

