
राजेश शर्मा,जोगबनी 17 जुलाई। भारत-नेपाल परिवहन संधि के तहत शुक्रवार से एक महत्वपूर्ण बदलाव लागू हो गया। अब कोलकाता, हल्दिया और विशाखापट्टनम बंदरगाहों से नेपाल के लिए भेजे जाने वाले सभी रेल कार्गो सीधे जोगबनी स्थित भारतीय कस्टम यार्ड होते हुए विराटनगर के नेपाली कस्टम यार्ड तक पहुंचेंगे। इसकी औपचारिक शुरुआत शुक्रवार को कोलकाता बंदरगाह से पहली रेल कार्गो सेवा रवाना कर की गई। भारत-नेपाल परिवहन संधि के तहत नेपाल को तीसरे देशों से होने वाले आयात और निर्यात के लिए भारत के सड़क,रेल एवं जलमार्ग का उपयोग करने की सुविधा प्राप्त है। इसी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए भारत सरकार के केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड ने 4 नवंबर 2025 को अधिसूचना संख्या 73/2025-कस्टम्स जारी कर इलेक्ट्रॉनिक कार्गो ट्रैकिंग सिस्टम नियमावली-2019 में संशोधन किया था। इसके तहत कोलकाता, हल्दिया और विशाखापट्टनम बंदरगाहों से नेपाल जाने वाले रेल कार्गो का दायरा बढ़ाकर विराटनगर कस्टम यार्ड तक कर दिया गया। इसके बाद 26 फरवरी 2026 को कोलकाता कस्टम ने प्रक्रियागत दिशा-निर्देश जारी करते हुए कोलकाता एवं हल्दिया से वीरगंज के अलावा जोगबनी कस्टम यार्ड के रास्ते विराटनगर कस्टम यार्ड तक रेल कार्गो भेजने की व्यवस्था लागू की। इस निर्णय को धरातल पर उतारने के लिए कोलकाता स्थित नेपाली महावाणिज्य दूतावास ने कोलकाता कस्टम, कोलकाता पोर्ट, शिपिंग लाइन और भारतीय कंटेनर निगम लिमिटेड के साथ समन्वय स्थापित किया। इसके बाद शुक्रवार को कोलकाता बंदरगाह से विराटनगर के लिए पहली आधिकारिक रेल कार्गो सेवा रवाना की गई।
इस अवसर पर नेपाली महावाणिज्य दूत झक्कप्रसाद आचार्य,कोलकाता कस्टम, कोलकाता पोर्ट व भारतीय कंटेनर निगम लिमिटेड के अधिकारियों की उपस्थिति में रेल रैक को हरी झंडी दिखाई गई। महावाणिज्य दूतावास के अनुसार,पहली रेल कार्गो में नेपाल की स्वस्तिक ऑयल इंडस्ट्रीज के लिए तीसरे देश से आयातित कच्चे माल के 40 उच्च क्षमता वाले 40 फीट कंटेनर भेजे गए हैं। सभी कंटेनरों में इलेक्ट्रॉनिक कार्गो ट्रैकिंग सिस्टम (ECTS) लगाया गया है, जिससे पूरे मार्ग में माल की डिजिटल निगरानी की जा सकेगी।
लंबे समय से उठ रही थी मांग भारत-नेपाल रेल यात्री सहजीकरण समिति के अध्यक्ष राजेश कुमार शर्मा ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि समिति लंबे समय से इस रेलखंड पर नियमित कार्गो रेल सेवा शुरू करने की मांग कर रही थी। उन्होंने कहा कि अब यह सेवा पूरी तरह शुरू हो चुकी है और इसके संचालन में कोई कानूनी बाधा नहीं रह गई है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से बथनाहा में माल उतारने की आवश्यकता कम होगी, जिससे वहां कोयला और क्लिंकर की ढुलाई से होने वाले प्रदूषण में भी कमी आने की उम्मीद है। साथ ही, भारत-नेपाल के बीच व्यापार और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को नई गति मिलेगी तथा समय और लागत दोनों में कमी आएगी।

