पटना, 30 अगस्त (अशोक “अश्क”) बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभागद्वारा चलाए जा रहे राजस्व महा-अभियान को अब ज़मीन पर गति मिलनी शुरू हो गई है। हाल ही में विभाग द्वारा की गई विशेष सर्वेक्षण संविदा कर्मियों से अपील का असर साफ नजर आने लगा है। 29 अगस्त की शाम तक राज्यभर में 2817 संविदा कर्मी पुनः काम पर लौट आए हैं और उन्होंने अपने-अपने सहायक बंदोबस्त पदाधिकारियों के समक्ष योगदान दे दिया है।

इस अभियान के तहत राजस्व शिविरों में रैयतों की भारी भागीदारी देखी जा रही है, जो अभियान की सफलता का बड़ा संकेत है। विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक राज्यभर में करीब दो लाख आवेदन रैयतों द्वारा शिविरों में जमा कराए जा चुके हैं। ये आवेदन मुख्य रूप से ऑनलाइन जमाबंदी में त्रुटि सुधार, ऑफलाइन जमाबंदी को ऑनलाइन कराना, बंटवारा नामांतरण और उत्तराधिकार नामांतरण से संबंधित हैं।
जिन जिलों से सर्वाधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, उनमें अररिया (21,849), औरंगाबाद (16,216), पटना (10,947), गया (10,082) और खगड़िया (9,251) प्रमुख हैं। यह दर्शाता है कि ग्रामीण जनता अब इस अभियान के महत्व को समझते हुए अपने अधिकारों के प्रति सजग हो रही है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल 3 करोड़ 60 लाख जमाबंदियों में से अब तक 55 फीसदी जमाबंदी पंजी की प्रति रैयतों को वितरित की जा चुकी है। इसमें सीतामढ़ी सबसे आगे है, जहां 89.99 फीसदी वितरण हो चुका है। इसके बाद वैशाली (86.19%), जहानाबाद (83.38%), गोपालगंज (81.16%) और शेखपुरा (80.73%) का स्थान आता है।
विभाग ने शेष जमाबंदी प्रतियों के वितरण को भी अभियान की अवधि के भीतर प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने का लक्ष्य तय किया है। इस अभियान के सफल क्रियान्वयन से राज्य में भूमि विवादों की संख्या में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

