

पूर्णिया:-12 सितम्बर (राजेश कुमार झा) उत्तर-पूर्व केसात राज्यों को जोड़ने वाली मुख्य सड़क जो पूर्णिया से गुजरती है. जिसे सेवन सिस्टर के नाम से भी जाना जाता है.आज से कई साल पहले पूर्णिया तस्करों एवं तस्करी के लिए बहुत ही सुरक्षित क्षेत्र कहा जाता था.कारण उत्तर-पूर्व के सात राज्यों का सीधा कनेक्शन था.कहने का मतलब उत्तर-पूर्व राज्यों से किन्हीं को भी सड़क रास्ते कहीं भी जाना हो तो उन्हें पूर्णिया की सड़कों से ही गुजरना पड़ेगा.इसलिए पूर्णिया को सेवन सिस्टर कहा जाता है.इसलिए पूर्णिया को तस्करों का सबसे सुरक्षित क्षेत्र कहा जाता है.लेकिन जब से बिहार में पूर्ण शराब बंदी हुई है,तस्करों एवं तस्करी में पहले से ज्यादा ही बढ़ोतरी देखी जा रही है.कारण उत्तर-पूर्व राज्यों से सूखे नशे यानि स्मैक,ब्राउन शुगर की तस्करी में काफी इजाफा हुआ है.हालांकि बिहार की पुलिस भी इस मामले को काफी गंभीरता से ली है और अपनी मुस्तैदी की वजह से तस्करी और तस्करों की कमर तोड़ दी है. लेकिन फिर भी सूखे नशे की तस्करी बदस्तूर जारी है.बताते चलें कि पूर्णिया जिले में विगत कुछ वर्षों से ब्राउन शुगर,स्मैक जैसे सूखे नशे का कारोबार गांव की गलियों तक दिखने लगा.जो बेहद ही चिंताजनक है.ऐसी स्थिति को कंट्रोल करने के लिए पूर्णिया पुलिस पहले से ज्यादा मुस्तैद दिख रही है.बताते चलें कि 23 जून 2026 को पूर्णिया जिले में बतौर वरीय पुलिस अधीक्षक की पदस्थापना हुई और डॉ0 शौर्य सुमन 23 जून 2026 को पूर्णिया के पहले वरीय पुलिस अधीक्षक का पदभार संभाला.पदभार संभालते ही एसएसपी डॉ0 शौर्य सुमन ने दो बड़े काम किए. पहला सूखे नशे और शराब पर और दूसरा दुर्घटना पर लगाम लगाए.सूखे नशे की के मामले में डॉ0 शौर्य सुमन ने विगत 75 दिनों में 16 करोड़ से अधिक के मूल्य की तकरीबन 8 किलो से अधिक स्मैक की बरामदगी कर तस्करों की कमर तोड़ दी है.जो पूरे बिहार में एक रिकॉर्ड बन गया है.
















