पटना, 30 अगस्त (अशोक”अश्क”) बिहार के ग्रामीण कार्य विभाग में तैनात अधीक्षण अभियंता विनोद कुमार राय के खिलाफ निगरानी विभाग (EOU) ने आय से अधिक संपत्ति मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं। EOU की टीम ने राय और उनके परिवार के नाम पर कई संपत्तियों के दस्तावेज़ और अन्य अवैध संपत्तियों के सबूत बरामद किए हैं, जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।

EOU की जांच में करीब 24 डीड पेपर (संपत्ति के दस्तावेज) मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि राय और उनके करीबियों के नाम पर कई संपत्तियां हैं। इसके अलावा, समस्तीपुर जिले के रोसड़ा और ओडिशा में स्थित कंस्ट्रक्शन से जुड़ी फैक्ट्री भी पकड़ी गई है, जिसका राय द्वारा पार्टनरशिप में चलाए जाने का खुलासा हुआ है। ये सबूत उनकी अवैध कमाई के स्रोतों की ओर इशारा कर रहे हैं। इसके आधार पर अब EOU ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) के तहत आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज करने की तैयारी कर ली है।
कुछ दिन पहले, EOU की टीम ने विनोद राय के पटना स्थित आवास पर छापेमारी की थी। हालांकि, छापेमारी के दौरान टीम को घर के बाहर ही रात भर इंतजार करना पड़ा। इस दौरान बताया गया कि राय और उनकी पत्नी ने मिलकर घर के भीतर नोटों की कई गड्डियां जला दी थीं। छापेमारी के दौरान पुलिस ने घर की पानी की टंकी से 50 लाख रुपये बरामद किए थे, जबकि घर की नाली भी जली हुई नोटों से जाम हो गई थी, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि राय ने अपनी अवैध कमाई को छिपाने या नष्ट करने की कोशिश की थी।
EOU के अधिकारियों का कहना है कि विनोद राय की संपत्तियों और उनकी आय के ज्ञात स्रोतों में भारी अंतर है, और यह उनके अवैध तरीके से कमाई का एक ठोस प्रमाण है। कंस्ट्रक्शन फैक्ट्री और संपत्ति के दस्तावेज़ राय की संपत्ति के स्रोतों की स्पष्ट पुष्टि करते हैं। अब इस मामले की जांच और तेज हो सकती है, और राय को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम को भी नया मोड़ दिया है और यह साबित कर दिया है कि सरकारी अफसरों की गलत कमाई पर कड़ी नजर रखी जा रही है। अब यह देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और राय की अवैध संपत्ति की जांच में कितने और नए खुलासे होते हैं।

