पटना, 31 अगस्त (अशोक “अश्क”) भागलपुर शहर और उसके आसपास के क्षेत्रों में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ता जा रहा है और खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच गया है। जल संसाधन विभाग के अनुसार, शनिवार शाम 5 बजे गंगा का जलस्तर 33.62 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 33.68 मीटर से केवल 6 सेंटीमीटर कम है। बीते 24 घंटों में गंगा में 15 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है, जबकि 25 अगस्त से 30 अगस्त के बीच यह करीब एक मीटर बढ़ चुकी है।

हालांकि विभाग का अनुमान है कि अगले दो दिनों में भागलपुर में जलस्तर स्थिर हो सकता है, क्योंकि प्रयागराज, वाराणसी, बक्सर और पटना जैसे अपस्ट्रीम क्षेत्रों में जलस्तर में गिरावट देखी जा रही है।
भागलपुर जिले के सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 34.50 मीटर से 92 सेंटीमीटर ऊपर 35.42 मीटर पर पहुंच गया है। वहीं, कहलगांव में भी जलस्तर खतरे के निशान 31.09 मीटर से 91 सेंटीमीटर ऊपर 32 मीटर दर्ज किया गया है। लगातार बढ़ते जलस्तर ने शहर के कई निचले इलाकों में तबाही मचानी शुरू कर दी है। बूढ़ानाथ, दीपनगर, मानिक सरकार घाट, किलाघाट और टीएमबीयू प्रशासनिक भवन के पीछे पानी भर गया है, जिससे स्थानीय लोगों को मुख्य सड़क तक पहुंचने में भारी परेशानी हो रही है।
सबौर प्रखंड में गंगा का कटाव स्थिर तो है, लेकिन जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में फिर पानी घुस गया है। कहलगांव के इस्माईलपुर-बिंदटोली तटबंध के किनारे भी गंगा का जल लगातार दबाव बना रहा है। अधिकारियों ने बताया कि कटाव वाले इलाकों में 24 घंटे निगरानी की जा रही है और अलग-अलग टीमें तैनात की गई हैं।
कहलगांव के ग्रामीण इलाकों जैसे प्रशस्तिडीह, कोदवार, घोघा, जानीडीह, भोलसर, एकचारी और ओगरी पंचायतों में कई घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। उच्च माध्यमिक विद्यालय, भोलसर में शनिवार को चार से पांच फीट तक पानी भर गया, बावजूद इसके स्कूल में पढ़ाई जारी रही।
जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता आदित्य प्रकाश ने बताया कि रविवार को भी जलस्तर में वृद्धि होने की संभावना है और खतरे के निशान को पार कर सकता है। लेकिन दो दिनों में इसमें गिरावट आनी शुरू हो सकती है। सभी तटबंधों और संवेदनशील क्षेत्रों पर विभाग की पैनी नजर है।
नाथनगर दियारा क्षेत्र के शंकरपुर, रत्तीपुर बैरिया, श्रीरामपुर और गोसाईंदासपुर गांवों की सड़कों पर भी पानी भर गया है। बीते सप्ताह कुछ राहत की उम्मीद जगी थी जब जलस्तर एक मीटर तक घट गया था, लेकिन अब पानी के फिर से बढ़ने से राहत शिविरों में शरण लिए लोग हताश हैं।
टीएनबी कॉलेजिएट मैदान में रह रहीं बच्ची यादव ने कहा, “इस साल तीसरी बार गंगा का पानी चढ़ा है। अब लगता है कि दशहरा तक घर नहीं लौट पाएंगे।”

