नई दिल्ली, 31 अगस्त (अशोक “अश्क”) गुजरात हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति संदीप भट्ट के प्रस्तावित ट्रांसफर के खिलाफ वकीलों ने मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को लगातार दूसरे दिन हाईकोर्ट के वकीलों ने न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया और अदालतों में कोई भी कानूनी प्रक्रिया नहीं की। वकीलों के इस विरोध के कारण कई मामलों की सुनवाई प्रभावित हुई।

ने जस्टिस भट्ट के तबादले के विरोध में एक छह सदस्यीय समिति का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता बृजेश त्रिवेदी कर रहे हैं। समिति का उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम के प्रस्ताव के खिलाफ विरोध दर्ज कराना और आवश्यक कदम उठाना है।
जस्टिस संदीप एन. भट्ट को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में ट्रांसफर किए जाने की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने की है। वहीं, एक अन्य जज जस्टिस रॉय को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट भेजे जाने की सिफारिश की गई है। कुल मिलाकर कॉलेजियम ने 14 जजों के तबादले की अनुशंसा की है, जिनमें दो गुजरात हाईकोर्ट से हैं।
बृजेश त्रिवेदी ने कहा, “हम जस्टिस भट्ट के तबादले का विरोध करते हैं। वे एक ईमानदार, निष्पक्ष और सम्मानित जज हैं। ऐसे ट्रांसफर से न्यायिक व्यवस्था पर प्रश्न उठते हैं। इसलिए हमने अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय लिया है।”
हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मिलने के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजा है। उम्मीद की जा रही है कि आगामी बातचीत में कोई समाधान निकल सकता है।
एसोसिएशन के उपाध्यक्ष विराट पोपट ने कहा, “हम सभी वकील जस्टिस भट्ट के साथ हैं। इस प्रस्तावित ट्रांसफर ने वकीलों की भावनाओं को आहत किया है। इसीलिए आम सभा की बैठक में न्यायिक कार्य ठप रखने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया।”
वकीलों की हड़ताल से सैकड़ों मामलों की सुनवाई प्रभावित** हुई है। अदालतों में पेश होने वाले वादकारी परेशान नजर आए। हालांकि, वकीलों ने स्पष्ट किया है कि यह विरोध शांतिपूर्ण है और सिर्फ न्यायिक मूल्यों की रक्षा के लिए किया जा रहा है।
जस्टिस भट्ट के ट्रांसफर के खिलाफ आगे की रणनीति को लेकर गुरुवार को फिर से बैठक बुलाई गई है। यदि कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो वकील अनिश्चितकालीन न्यायिक बहिष्कार जारी रखने पर विचार कर सकते हैं।
इस घटनाक्रम से गुजरात हाईकोर्ट का माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है और सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के अगले कदम पर टिकी हैं।

