पटना, 5 सितम्बर (अशोक “अश्क”) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कथित अपमानजनक भाषा में संबोधित किए जाने के विरोध में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन द्वारा आयोजित ‘बिहार बंद’को राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव ने पूरी तरह असफल करार दिया है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी इस बंद के जरिए महिलाओं और आम नागरिकों को परेशान करने की कोशिश* कर रही है, लेकिन फिर भी बंद का जमीनी असर नहीं दिखा।

शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने बीजेपी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने लिखा, “विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी ने बिहार में दुनिया भर की गुंडागर्दी की। भाजपाई गुंडों ने सरेआम महिलाओं, शिक्षिकाओं, छात्राओं और यहां तक कि शहीद के परिजनों तक को नहीं बख्शा।”
उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी कार्यकर्ताओं ने एम्बुलेंस रोकी, बच्चों को स्कूल जाने से रोका, बुजुर्गों को धक्का दिया, लेकिन इसके बावजूद वे एक पंचायत तो दूर, एक वार्ड तक भी बंद नहीं करवा सके। तेजस्वी ने यह भी दावा किया कि बंद के दौरान आम लोग बीजेपी के साथ नहीं दिखे और सड़कों पर बीजेपी के कार्यकर्ताओं की संख्या नाम मात्र रही।
तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी व्यंग्यात्मक हमला करते हुए कहा कि, “जैसे रैलियों में पुलिस और प्रशासन के दबाव में भीड़ इकट्ठी की जाती है, वैसे ही बिहार बंद में भी पुलिस से ट्रैफिक रुकवा लेते, तो शायद कुछ असर दिखता।”
उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात के रहने वाले प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार की आम जनता को परेशान करने का ‘मस्ती भरा’ निर्णय लिया, जिससे उनकी सोच जाहिर होती है। तेजस्वी ने तंज कसा कि बंद में भी उन्हें ‘भाड़े के लोग’ बुला लेने चाहिए थे, जिससे कुछ भीड़ तो दिखती।
तेजस्वी के इस बयान के साथ आरजेडी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि जनता ने एनडीए के बिहार बंद को पूरी तरह खारिज कर दिया है। विपक्ष का दावा है कि यह बंद सिर्फ राजनीतिक स्टंट था, जिसका जनता से कोई सरोकार नहीं था।
अब देखना यह होगा कि भाजपा तेजस्वी के इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है।

