नई दिल्ली, 8 सितम्बर (अशोक “अश्क”) जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने रविवार, 7 सितंबर 2025 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह फैसला उन्होंने जुलाई में हुए संसदीय चुनाव में अपनी पार्टी की ऐतिहासिक हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए किया। इशिबा की अगुवाई में सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) उच्च सदन में बहुमत हासिल करने में नाकाम रही, जिससे उनकी सरकार की स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।

प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग पार्टी के भीतर काफी समय से उठ रही थी। पार्टी के दक्षिणपंथी धड़े लगातार उन पर पद छोड़ने का दबाव बना रहे थे। हालांकि, अक्टूबर 2024 में प्रधानमंत्री बने इशिबा ने पहले इन मांगों को नजरअंदाज करते हुए कहा था कि उनका इस्तीफा देश को राजनीतिक अस्थिरता की ओर ले जाएगा।
रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिगेरु इशिबा ने अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि पार्टी के भीतर नया नेतृत्व चुना जाए। उन्होंने कहा, “मैं पार्टी को एक नई दिशा देने के लिए नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू करूंगा। सोमवार को होने वाला नेतृत्व चुनाव अब आवश्यक नहीं रहेगा।”
एक रिपोर्ट के अनुसार, इशिबा का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब एलडीपी नेतृत्व चुनाव को लेकर समय से पहले वोटिंग कराने जा रही थी। अगर यह वोटिंग होती, तो इसे इशिबा के खिलाफ एक तरह का अविश्वास प्रस्ताव माना जाता।
सूत्रों के अनुसार, इस्तीफा देने से पहले इशिबा ने कृषि मंत्री शिंजिरो कोइजुमी और पूर्व प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा से मुलाकात की। ऐसा माना जा रहा है कि इन वरिष्ठ नेताओं ने ही उन्हें इस्तीफे की सलाह दी थी।
अपने कार्यकाल के दौरान इशिबा को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ, देश में महंगाई की मार, चावल नीति में सुधार और क्षेत्रीय तनाव जैसे मुद्दों ने उनकी सरकार की लोकप्रियता को प्रभावित किया। खासकर जापानी किसानों के बीच उनकी नीतियों को लेकर नाराजगी देखी गई।
अब पार्टी को नए प्रधानमंत्री के चुनाव की चुनौती का सामना करना है। अगला नेता किसे बनाया जाएगा, इस पर राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं। फिलहाल पार्टी का ध्यान देश में राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने और आर्थिक संकट से निपटने की दिशा में होगा।

