भागलपुर, 10 सितम्बर (विक्रांत) बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर ने मखाना को वैश्विक सुपरफूड ब्रांड बनाने हेतु एक नया कार्ययोजना जारी किया है। मखाना विकास योजना (एमडीएस) की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में, जिसकी अध्यक्षता बीएयू सबौर के अनुसंधान निदेशक एवं एमडीएस के सीईओ डॉ. अनिल कुमार सिंह ने की, वैज्ञानिकों एवं संस्थागत प्रतिनिधियों ने किसान आय बढ़ाने, बीज गुणवत्ता सुधारने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार की रणनीतियों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया।

बैठक में डॉ. शैलबाला डे (उप निदेशक अनुसंधान), प्रो. (डॉ.) दिलीप कुमार महतो (सह-डीन सह प्राचार्य, बीपीएसएसी पूर्णिया एवं नोडल, एमडीएस), डॉ. अनिल कुमार (प्रधान अन्वेषक, एमडीएस), डॉ. तपन गोराई (सह-अन्वेषक), डॉ. अभिनव कुमार, डॉ. बाल कृष्ण तथा डॉ. प्रीति सुन्दरम सहित अन्य समिति सदस्य एवं हितधारक उपस्थित रहे।
बैठक में पायलट प्रोजेक्ट की समीक्षा, किस्म सुधार, कीट प्रबंधन तथा ‘नो योर क्रॉप’ (केवाईसी) पहल के तहत ऑर्गेनिक मखाना के संवर्धन पर विशेष चर्चा हुई। समिति ने प्रत्येक पखवाड़े “मखाना चौपाल” आयोजित करने पर बल दिया, जिससे किसानों को वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध हो सके। साथ ही प्रशिक्षण मॉड्यूल, क्षेत्र-विशिष्ट कृषि पैकेज एवं किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के माध्यम से व्यापक प्रसार की योजनाओं को अंतिम रूप दिया गया।
मखाना की महत्ता पर बल देते हुए डॉ. अनिल कुमार सिंह, अनुसंधान निदेशक एवं सीईओ, एमडीएस ने कहा:
“मखाना केवल मिथिला की फसल नहीं, बल्कि भारत का गौरव है। जलवायु-लचीले सुपरफूड के रूप में इसमें अपार पोषण एवं आर्थिक संभावनाएं हैं। यह किसानों की आय बढ़ाने के साथ भारत के निर्यात टोकरे को भी सशक्त बनाएगा। बीएयू सबौर, एमडीएस के माध्यम से तकनीक को खेत-खेत तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।”
बीएयू सबौर और आईटीसी लिमिटेड के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर विचार किया जा रहा है, जिसके तहत मखाना की खेती का विस्तार और किसानों को बेहतर बाजार पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य होगा। यह सहयोग तालाब से थाली तक पूरे वैल्यू चेन को सुदृढ़ करेगा।
प्रगति की सराहना करते हुए बीएयू सबौर के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने कहा, “बीएयू सबौर मखाना अनुसंधान एवं विकास का राष्ट्रीय केंद्र बनकर उभरा है। मखाना विकास योजना के माध्यम से हम न केवल उत्पादन बढ़ा रहे हैं, बल्कि मिथिला मखाना की वैश्विक पहचान भी गढ़ रहे हैं। विज्ञान, नवाचार और किसान सहभागिता की यह संगति भारत की कृषि-अर्थव्यवस्था में नया अध्याय लिखेगी।”
बैठक का समापन इस सामूहिक संकल्प के साथ हुआ कि बिहार को भारत की मखाना क्रांति का केन्द्र बनाया जाएगा। बीएयू सबौर ने सतत कृषि नवाचार एवं किसान-केन्द्रित विकास में अपनी अग्रणी भूमिका को एक बार फिर पुष्ट किया।

