पूर्णिया, 13 सितंबर (राजेश कुमार झा) आगामी 15 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पूर्णिया में होने वाली जनसभा पूरे सीमांचल के लिए ऐतिहासिक साबित हो सकती है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह कार्यक्रम सीमांचल की दशा और दिशा दोनों को बदलने की क्षमता रखता है। यह जनसभा सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विकास की संभावनाओं और सामाजिक समीकरणों को नया मोड़ देने वाला साबित हो सकता है।

बिफोरप्रिंट डिजिटल के चीफ पॉलिटिकल एडिटर आर. कौशलेंद्र ने इस जनसभा को “सीमांचल के राजनीतिक परिदृश्य में संभावित बदलाव की शुरुआत” करार दिया है। उन्होंने कहा कि अगर यह कार्यक्रम सफल होता है, तो आगामी विधानसभा चुनावों में यहां के समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं, क्योंकि सीमांचल की अधिकांश सीटों पर मुस्लिम वोटरों का गहरा प्रभाव है।
प्रधानमंत्री का यह दौरा कई मायनों में शुभ संकेत लेकर आ रहा है। वर्षों से लंबित कोसी-मेची लिंक परियोजना, जो पिछले 25-30 वर्षों से फाइलों में दबी पड़ी थी, अब साकार होती दिख रही है। यह योजना सीमांचल के किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगी, जिससे सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण और कृषि उत्पादन में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।
इसके अलावा, पूर्णिया एयरपोर्ट के शुरू होने की घोषणा भी सीमांचल में विकास के नए द्वार खोलेगी। इससे न केवल व्यापारिक गतिविधियों को बल मिलेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर भी प्राप्त होंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर इस जनसभा को पूरी निष्ठा और रणनीति के साथ सफल बनाया गया, तो यह सीमांचल को विकास और राजनीतिक स्थिरता की नई राह पर ले जाएगी। अब देखना यह है कि 15 सितंबर को पूर्णिया की ज़मीन पर होने वाली यह ऐतिहासिक जनसभा कितनी दूरगामी प्रभाव छोड़ती है।

