गोपालगंज, 15 सितम्बर (ऊषा मिश्रा) “गांव के अंधेरे को इक चराग काफी है,सौ चराग जलते है इक चराग जलने से”किसी शायर की यह पंक्तियां आज अंधेरों को रोशन कर रहे चंद युवाओं पर एकदम फिट बैठती है। जो गांव के मलिन बस्तियों में घूम-घूम कर उनके बीच जन्मदिन,सालगिरह और अदर खास मौकों पर उनके बीच जाकर खुशियां बांटते हैं। आज के दौर में जहां होटल, रेस्टोरेंट बड़े बड़े रिसॉर्ट में जन्मदिन सालगिरह आदि सेलिब्रेट करने का प्रचलन बढ़ा है।

वही जिले के आधा दर्जन युवा अपने सभी ओकेजन गांव के मलिन बस्तियों में मनाकर एक नया संदेश दे रहे है। वे मलिन बस्तियों के बच्चों व उनके परिवार के साथ केक काटते खाना खाते हैं और उनके बीच वस्त्र बांटते हैं। जिले के प्रकाश फाउंडेशन नामक संस्था ने समाज को यह नई राह दिखाई है। फाउंडेशन के सदस्य हर सेलिब्रेशन में मलिन बस्तियों और उपेक्षित परिवार के बच्चों के बीच कपड़े किताबें दूध दवा तथा बुजुर्गों व महिलाओं की जरूरतों का भी ध्यान रखते हैं।

फाउंडेशन के संचालक प्रकाश गिरी कहते है कि हमारी कोशिश है कि हर उत्सव जरूरतमंदों के बीच मनाकर उन्हें यह एहसास दिलाएं कि वे भी समाज के अभिन्न हिस्से हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पहल से समाज में आपसी सहयोग और मानवीय संवेदनाओं की भावना मजबूत रही है। संस्था के पदाधिकारियों का कहना है कि असली खुशी वही है,जो दूसरों के चेहरे पर मुस्कान दे सके। इसी सोच के साथ फाउंडेशन के सदस्य बस्तियों में पहुंचकर बच्चों को कपड़े, किताबें, खिलौने और मिठाइयां बांटते हैं। साथ ही बुजुर्गों और महिलाओं को धोती विटामिन्स की दवा दूध सहित जरूरतों का भी ध्यान रखते हैं।

प्रकाश फाउंडेशन के संस्थापक श्री गिरी कहते हैं कि दिनों दिन समाज में जन्मदिन मनाने का चलन बदलता जा रहा है। लोग अपने जन्मदिन पर महंगे केक काटकर, चेहरे पर क्रीम पोतकर और फिजूलखर्ची में लाखों रुपये उड़ा देते हैं। लेकिन क्या यह सचमुच खुशी देने वाला जश्न है ? फाउंडेशन मानता है कि असली खुशी तब है,जब आपकी वजह से किसी भूखे के चेहरे पर मुस्कान आएं। जब किसी नन्हें मासूम के पेट की भूख मिट सके। जब कोई बच्चा,जो अब तक सिर्फ सपनों में स्वादिष्ट भोजन देखता था,वह आपके जन्मदिन पर उसे वास्तविकता में पा सके। इसी सोच के साथ प्रकाश फाउंडेशन समाज में एक नई परंपरा की शुरुआत किया है। उक्त संस्था हर रविवार जरूरतमंद बच्चों के बीच भोजन और कपड़ों का वितरण करती है। यही नहीं,अपने व परिवार के सदस्यों के जन्मदिन शादी की सालगिरह सहयोगियों व उनके रिश्तेदारों के जन्मदिन भी इन मलिन बस्ती के बच्चों व उनके माता पिता के बीच मनाते है। इस पहल का उद्देश्य है कि लोग दिखावे और फिजूलखर्ची से हटकर अपनी खुशियों को उनके बीच बांटे जो इससे वंचित हैं। प्रकाश कहते हैं कि खुशियां बांटने से बढ़ती हैं,और सेवा से आत्मा और दोनों को संतुष्टि मिलती है। फाउंडेशन यह आह्वान करता है कि अगली बार जब आपका या आपके प्रिय का जन्मदिन आएं तो उसे केक काटकर व्यर्थ खर्च में न गवाये बल्कि एक गरीब बच्चे की मुस्कान बनें,क्योंकि यही जन्मदिन मनाने का असली अर्थ है।

