नई दिल्ली, 15 सितंबर (अशोक “अश्क”) मणिपुर में जातीय हिंसा की चिंगारी एक बार फिर भड़क उठी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो साल बाद मणिपुर दौरे के अगले ही दिन रविवार को चूड़ाचांदपुर जिले में हालात बिगड़ गए। स्थानीय लोगों ने थाने पर धावा बोल दिया और सुरक्षा बलों पर पथराव किया। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर राज्य में तनाव बढ़ा दिया है।
शनिवार को पीएम मोदी ने चूड़ाचांदपुर में एक बड़ी रैली को संबोधित करते हुए मणिपुर के लोगों के जज्बे को सलाम किया था और कहा था कि “यह धरती हिम्मत और हौसले की प्रतीक है।” उन्होंने मणिपुर को “शांति और एकता की भूमि” बनाने का वादा किया था। लेकिन रविवार को हालात बिल्कुल उलट नजर आए।

रविवार को स्थानीय पुलिस ने दो युवकों को हिरासत में लिया था, जिन पर पीएम मोदी की यात्रा के सिलसिले में लगे बैनर और कटआउट को फाड़ने का आरोप था। ये पोस्टर और बैनर पियरसनमुन और फाइलिएन बाजार इलाके में लगाए गए थे, जिन्हें 11 सितंबर की रात को नुकसान पहुंचाया गया था।
इन दो युवकों की गिरफ्तारी के विरोध में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग चूड़ाचांदपुर पुलिस स्टेशन के बाहर इकट्ठा हो गए और जल्द रिहाई की मांग करने लगे। देखते ही देखते भीड़ उग्र हो गई और पुलिस स्टेशन पर हमला कर दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों के बीच तीखी झड़प हुई।
प्रदर्शनकारियों ने RAF जवानों पर जमकर पथराव किया। सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया में आई तस्वीरों में देखा जा सकता है कि RAF के जवान अपनी ढालों से खुद को बचाते नजर आए। स्थिति तब शांत हुई जब ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने हस्तक्षेप करते हुए दोनों युवकों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
चूड़ाचांदपुर जिला पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भीड़ की ओर से लगाए गए “मनमानी गिरफ्तारी” के आरोप गलत हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों युवकों को तोड़फोड़ वाली जगह से पूछताछ के लिए लाया गया था और उन्हें बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया।
हालांकि, शुरुआती घंटों में पुलिस ने यह कहा था कि दोनों को गिरफ्तार किया गया है, जिससे भ्रम और आक्रोश की स्थिति बनी।
मई 2023 से मणिपुर जातीय संघर्ष की आग में झुलस रहा है। कुकी और मेइती समुदाय के बीच तनाव और हिंसा में अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हजारों विस्थापित हो चुके हैं। इन हालातों के बीच पीएम मोदी की शनिवार को हुई यात्रा को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था, लेकिन अगले ही दिन हिंसा की ताजा घटना ने राज्य की नाजुक स्थिति को फिर उजागर कर दिया है।
अब सवाल उठता है कि क्या मणिपुर में शांति बहाल हो सकेगी, या फिर हिंसा और अविश्वास का यह चक्र और लंबा खिंचेगा? राज्य और केंद्र सरकार के सामने चुनौती अब भी बरकरार है।

