नई दिल्ली, 19 सितम्बर (अशोक “अश्क”) रियाद और इस्लामाबाद के बीच ऐतिहासिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर के बाद पाकिस्तान में उत्साह की लहर है। इस समझौते को लेकर पाकिस्तान न सिर्फ रणनीतिक रूप से आश्वस्त नजर आ रहा है, बल्कि उसे उम्मीद है कि अन्य अरब देश भी जल्द ही इस पहल का हिस्सा बन सकते हैं।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इस दिशा में संकेत देते हुए कहा है कि यह समझौता किसी एक या दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी तीसरे देश के प्रवेश के लिए दरवाजे बंद नहीं किए गए हैं। यह समझौता इस तरह से तैयार किया गया है कि अन्य अरब देश भी इसमें शामिल हो सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुआ यह समझौता न केवल एक दूसरे की रक्षा का वादा करता है, बल्कि किसी एक देश पर हमले को दोनों पर हमला माना जाएगा।
पत्रकारों से बातचीत में ख्वाजा आसिफ ने इस बात को लेकर खुलकर अपनी राय रखी कि क्या इस समझौते में अन्य अरब देशों के शामिल होने की गुंजाइश है। उन्होंने कहा, “मैं समय से पहले कुछ नहीं कह सकता, लेकिन यह जरूर कह सकता हूँ कि दरवाजे खुले हैं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस समझौते में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो किसी अन्य देश के शामिल होने पर रोक लगाता हो।
ख्वाजा आसिफ ने मुस्लिम देशों के बीच नाटो जैसी एक साझा रक्षा प्रणाली की वकालत की। उन्होंने कहा, “मुस्लिम राष्ट्रों को मिलकर अपनी रक्षा करना उनका मौलिक अधिकार है।” जब उनसे पूछा गया कि क्या इस समझौते में पाकिस्तान की परमाणु क्षमताएं भी साझी की जाएंगी, तो उन्होंने कहा, “जो कुछ हमारे पास है, वह निश्चित रूप से इस समझौते के अंतर्गत उपलब्ध होगा। पाकिस्तान एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति है और हमारे इस दर्जे को आज तक किसी ने चुनौती नहीं दी है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह समझौता कोई आक्रामक गठबंधन नहीं है, बल्कि एक रक्षात्मक व्यवस्था है, जैसी कि नाटो। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान लंबे समय से सऊदी अरब की सेनाओं को प्रशिक्षण दे रहा है और यह समझौता उसी संबंध का एक औपचारिक विस्तार है।
ख्वाजा आसिफ ने अंत में यह भी दोहराया कि मक्का और मदीना जैसे इस्लाम के पवित्र स्थलों की सुरक्षा पाकिस्तान का पवित्र कर्तव्य है, और यह समझौता उस प्रतिबद्धता का भी एक हिस्सा है।

