एच-1बी वीजा फीस में ट्रंप की भारी बढ़ोतरी से मचा हड़कंप, माइक्रोसॉफ्ट और जेपी मॉर्गन ने कर्मचारियों को दी चेतावनी

नई दिल्ली, 20 सितम्बर (अशोक “अश्क”) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एच-1बी वीजा की फीस में भारी बढ़ोतरी के फैसले ने वैश्विक तकनीकी उद्योग में चिंता की लहर दौड़ा दी है। ट्रंप ने शुक्रवार को एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए जिसके तहत एच-1बी वीजा शुल्क को बढ़ाकर सालाना 1,00,000 अमेरिकी डॉलर कर दिया गया है। इस निर्णय से अमेरिका में काम कर रहे भारतीय आईटी पेशेवरों पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।


ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह फीस वृद्धि उन अत्यधिक कुशल कामगारों को ही अमेरिका में प्रवेश देने के लिए है जो अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरियों को प्रभावित न करें। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “हमें बेहतरीन कामगारों की जरूरत है और इस कदम से यह सुनिश्चित होगा कि सिर्फ योग्यतम ही अमेरिका आएं।”
ट्रंप के इस फैसले के बाद अमेरिकी टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट ने एच-1बी और एच-4 वीजा धारकों को जल्द से जल्द अमेरिका लौटने की सलाह दी है। कंपनी ने कर्मचारियों को भेजे गए एक आंतरिक ईमेल में कहा है कि निकट भविष्य में वीजा प्रक्रियाएं और अधिक जटिल हो सकती हैं, इसलिए जो भी कर्मचारी विदेश में हैं, वे जल्द अमेरिका लौट आएं।
एक रिपोर्ट के अनुसार, इस ईमेल में लिखा गया है, “हम एच-1बी और एच-4 वीजा धारकों को सख्त सलाह देते हैं कि वे समय-सीमा से पहले अमेरिका लौट आएं ताकि भविष्य में किसी प्रकार की अप्रत्याशित स्थिति से बचा जा सके।”
इसी तरह, जेपी मॉर्गन के इमिग्रेशन काउंसल ने भी अपने कर्मचारियों को चेतावनी दी है कि वे अगली सूचना तक किसी भी तरह की अंतरराष्ट्रीय यात्रा से बचें और अमेरिका में ही बने रहें।
एक अन्य की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2020 से 2023 के बीच एच-1बी वीजा के 73.7% लाभार्थी भारतीय नागरिक थे। इसके बाद चीन (16%), कनाडा (3%) और अन्य देश जैसे ताइवान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, नेपाल, ब्राजील, पाकिस्तान और फिलीपींस आते हैं।
व्हाइट हाउस स्टाफ सचिव विल शार्फ ने कहा कि एच-1बी कार्यक्रम अमेरिका की सबसे अधिक दुरुपयोग की जाने वाली वीजा प्रणालियों में से एक है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस वीजा के जरिए ऐसे लोग अमेरिका आते हैं जो स्थानीय अमेरिकी नौकरियों को खतरे में डालते हैं।
वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने बताया कि अमेरिका हर साल औसतन 2.81 लाख लोगों को ग्रीन कार्ड देता है, जिनमें से अधिकतर की आय अमेरिका के औसत वेतन से कम होती है। उन्होंने कहा, “हम अमेरिका के लिए निचले स्तर के कामगारों की भर्ती कर रहे थे, जो अब बंद होगा। हम अब सिर्फ असाधारण लोगों को ही अमेरिका बुलाएंगे।”
ट्रंप प्रशासन के अनुसार, इस नए वीजा शुल्क से अमेरिका को 100 अरब डॉलर से अधिक का राजस्व मिलेगा, जिसका उपयोग कर्ज चुकाने और करों में कटौती के लिए किया जाएगा।
यह फैसला न केवल अमेरिका में काम कर रहे हजारों भारतीयों के लिए चिंता का विषय बन गया है, बल्कि भारतीय आईटी कंपनियों और वैश्विक स्टार्टअप्स की रणनीति पर भी गहरा असर डाल सकता है।

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