नई दिल्ली, 20 सितम्बर (अशोक “अश्क”) अमेरिका द्वारा H-1B वीजा की एप्लिकेशन फीस को करीब ₹88 लाख (1 लाख डॉलर) तक बढ़ाए जाने के फैसले पर भारत में सियासी घमासान मच गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए उन्हें “कमजोर प्रधानमंत्री” बताया। राहुल ने 2017 का एक पुराना पोस्ट भी दोबारा शेयर किया, जिसमें उन्होंने मोदी पर H-1B वीजा मसले पर अमेरिका से बातचीत न करने का आरोप लगाया था।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “मोदी ने अपने जन्मदिन पर जो रिटर्न गिफ्ट दिया है, उससे हर भारतीय दुखी है। विदेशी नीति ‘मोदी-मोदी’ के नारों से नहीं, राष्ट्रीय हितों की रक्षा से बनती है।” खड़गे ने कहा कि 70% H-1B वीजा धारक भारतीय हैं और नई फीस से सबसे ज्यादा असर भारतीय टेक प्रोफेशनल्स पर पड़ेगा। केवल 10 क्षेत्रों में भारत को ₹2.17 लाख करोड़ तक का संभावित नुकसान हो सकता है।
कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने भी मोदी की चुप्पी को “राष्ट्रीय हितों पर बोझ” बताया। उन्होंने पूर्व पीएम मनमोहन सिंह का उदाहरण देते हुए कहा कि जब अमेरिका में भारत की महिला राजदूत का अपमान हुआ था, तब भारत ने सख्त कदम उठाए थे।
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को व्हाइट हाउस में नए आदेश पर हस्ताक्षर किए। अब H-1B वीजा के लिए कंपनियों को \$1,00,000 फीस और \$15,000 की जांच शुल्क देनी होगी। यह फीस पहले ₹1-6 लाख के बीच थी। साथ ही, EB-1 और EB-2 वीजा को भी खत्म कर “गोल्ड कार्ड” नामक नई स्कीम लाने की तैयारी है।
व्हाइट हाउस के स्टाफ सेक्रटरी विल शार्फ ने कहा कि H-1B वीजा प्रोग्राम का अब तक सबसे ज्यादा दुरुपयोग हुआ है। नई व्यवस्था से सुनिश्चित होगा कि केवल अत्यधिक स्किल्ड लोग ही अमेरिका आएं।
भारत के लिए चिंता की बात यह है कि 2024 में H-1B वीजा पाने वालों में 2.07 लाख भारतीय थे। अब इतनी महंगी फीस के कारण मिड-लेवल और एंट्री-लेवल कर्मचारियों को अमेरिका भेजना मुश्किल होगा। इससे कंपनियां नौकरियां आउटसोर्स कर सकती हैं या यूरोप, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया की ओर रुख करेंगे।
इंफोसिस, TCS, विप्रो जैसी कंपनियां H-1B वीजा की सबसे बड़ी स्पॉन्सर हैं। अब इस बदलाव से भारत का टेक टैलेंट अमेरिका से दूर हो सकता है।
अमेजन को इस साल सबसे ज्यादा 10,000 H-1B वीजा मिले हैं, जबकि माइक्रोसॉफ्ट और मेटा को 5,000 से ज्यादा। हालांकि अमेरिकी टेक कर्मचारियों का एक वर्ग इस वीजा प्रणाली की आलोचना करता रहा है, आरोप लगाते हुए कि इससे उनकी नौकरियां छीनी जाती हैं।
यह वीजा 3 साल के लिए होता है जिसे 6 साल तक बढ़ाया जा सकता है।

