हैदराबाद, 21 सितम्बर (अंकिता राय) तेलंगाना सरकार ने स्थानीय निकाय चुनावों में 42% आरक्षण लागू करने का निर्णय लिया है और घोषणा की है कि पंचायत चुनाव इसी नई आरक्षण व्यवस्था के तहत कराए जाएंगे। यह फैसला राज्य में सामाजिक न्याय और समावेशी शासन को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह आरक्षण पिछड़ी जातियों (बीसी) को अधिक प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से लागू किया गया है। बीसी आयोग की सिफारिशों के आधार पर पंचायत, मंडल परिषद और जिला परिषद की सीटों का नया आरक्षण प्रारूप तैयार किया गया है।
राज्य सरकार चाहती है कि पंचायत चुनाव प्रक्रिया 30 सितंबर 2025 से पहले शुरू हो जाए ताकि उच्च न्यायालय द्वारा तय समयसीमा का पालन सुनिश्चित किया जा सके। चुनाव आयोग ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे मतदाता सूची, आरक्षण रोटेशन और अन्य चुनावी तैयारियों को शीघ्र पूरा करें।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने इस निर्णय को सामाजिक समावेशन की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता बताया। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य सिर्फ चुनाव कराना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हर वर्ग को उसकी हिस्सेदारी मिले। सामाजिक न्याय हमारी प्राथमिकता है।”
वहीं, इस फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ भी सामने आई हैं। कांग्रेस ने इसे सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है, जबकि विपक्ष ने सरकार पर समयसीमा को लेकर लापरवाही का आरोप लगाया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंचायत चुनावों से पहले इस तरह का आरक्षण लागू करना राज्य की राजनीतिक स्थिति को काफी प्रभावित कर सकता है और यह आगामी चुनावों में समीकरण बदलने की क्षमता रखता है।
यह फैसला राज्य में लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत करने और सामाजिक संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

