नई दिल्ली, 21 सितम्बर (अशोक “अश्क”) अमेरिका से टैरिफ और H-1B वीजा की चुनौतियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को समुद्री महाशक्ति बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। शनिवार को गुजरात के भावनगर में ‘समुद्र से समृद्धि’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने 70,000 करोड़ रुपये की तीन नई योजनाओं का ऐलान किया, जो शिपबिल्डिंग और नौवहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देंगी। इस दौरान उन्होंने 34,200 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया।

पीएम मोदी ने कहा, “चिप हो या शिप, हमें भारत में ही बनाने होंगे।” उन्होंने भारत की आयात-निर्भरता को देश की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बताया और आत्मनिर्भर भारत के विजन को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत के पास जितने जहाज हैं, उनमें से केवल 7% भारत में बने हैं और शिप ओनरशिप के मामले में भारत दुनिया में 16वें स्थान पर है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि पहले भारत घरेलू स्तर पर बने जहाजों से 40% आयात-निर्यात करता था, लेकिन अब यह घटकर मात्र 5% रह गया है। उन्होंने चिंता जताई कि भारत हर साल विदेशी नौवहन कंपनियों को लगभग 6 लाख करोड़ रुपये का भुगतान करता है। “अगर पिछली सरकारों ने समय रहते इस क्षेत्र में निवेश किया होता, तो आज दुनिया भारतीय जहाजों का इस्तेमाल कर रही होती,” मोदी ने कहा।
घोषित तीन योजनाएं इस प्रकार हैं:
- शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम (25,000 करोड़ रुपये) – इस योजना के तहत जहाज निर्माण कंपनियों को वित्तीय सहायता दी जाएगी, जिससे उन्हें कम ब्याज दर पर ऋण मिल सकेगा।
- मैरिटाइम डिवेलपमेंट फंड (25,000 करोड़ रुपये) – इस कोष से नौवहन क्षेत्र के उद्यमियों को दीर्घकालिक सुरक्षा और समर्थन मिलेगा।
- ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग मेगा क्लस्टर्स (20,000 करोड़ रुपये) – इस योजना का उद्देश्य नए शिपबिल्डिंग क्लस्टर्स के विकास के लिए भूमि, कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे का विस्तार करना है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि बड़े जहाजों को अब “इंफ्रास्ट्रक्चर” का दर्जा दिया गया है, जिससे जहाज निर्माण कंपनियों को ऋण और निवेश में अतिरिक्त सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही, उन्होंने ‘एक राष्ट्र, एक दस्तावेज’ और ‘एक राष्ट्र, एक बंदरगाह’ नीति की घोषणा की, जिससे व्यापार प्रक्रियाएं आसान होंगी।
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि समुद्री क्षेत्र में कई कानूनी सुधार किए गए हैं और पांच पुराने समुद्री कानूनों को नए स्वरूप में लाया गया है, जिससे पोर्ट प्रशासन और नौवहन में व्यापक बदलाव आएंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार, इन योजनाओं से भारत को चीन और दक्षिण कोरिया जैसे शिपबिल्डिंग महाशक्तियों की प्रतिस्पर्धा में खड़ा किया जा सकेगा। आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में करीब 2 करोड़ रोजगार सृजित होने की संभावना है। ये योजनाएं जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजी जाएंगी।
प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश स्पष्ट है अब भारत न केवल अपने जहाज खुद बनाएगा, बल्कि वैश्विक समुद्री शक्ति बनने की दिशा में निर्णायक कदम भी उठाएगा।

