नई दिल्ली, 23 सितम्बर (अशोक अश्क”) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा शुल्क को 1 लाख डॉलर तक बढ़ाकर दुनियाभर को चौंका दिया है। लेकिन अब इस फैसले में कुछ खास वर्गों को राहत मिलने की संभावनाएं दिख रही हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को वीजा शुल्क में छूट देने पर विचार कर रहा है।

यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब अमेरिका को डॉक्टरों और हेल्थ स्टाफ की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन ने चेतावनी दी थी कि अत्यधिक वीजा शुल्क के चलते अमेरिका में डॉक्टरों की संख्या और घट सकती है। कई अस्पताल जैसे मेयो क्लिनिक, क्लीवलैंड क्लिनिक और सेंट जूड हॉस्पिटल H-1B वीजा पर काम कर रहे विदेशी डॉक्टरों पर निर्भर हैं।
मेयो क्लिनिक के पास ही 300 से ज्यादा स्वीकृत वीजा हैं। ऐसे में शुल्क बढ़ने से अमेरिका की हेल्थकेयर व्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने कहा कि, “नया कानून संभावित छूटों की अनुमति देता है, जिसमें डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ शामिल हो सकते हैं।”
भारत, H-1B वीजा का सबसे बड़ा लाभार्थी देश है और इस फैसले का सीधा असर भारत के आईटी और मेडिकल सेक्टर पर पड़ा है। वीजा शुल्क में अचानक वृद्धि से भारतीय आईटी कंपनियों में हड़कंप मच गया था, क्योंकि यह शुल्क पहले की तुलना में बहुत ज्यादा है। हालांकि अब डॉक्टरों के लिए छूट की खबर ने भारत को कुछ राहत की उम्मीद दी है।
ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 21 सितंबर या इसके बाद दायर किए गए सभी नए H-1B वीजा आवेदनों पर एक बार का 1 लाख डॉलर शुल्क लगेगा, जिसे सालाना शुल्क नहीं समझा जाना चाहिए।
इस फैसले के बाद भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ और वीजा को लेकर हलचल तेज हो गई है। हालांकि दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय बातचीत भी जारी है। हाल ही में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी समकक्ष मार्को रुबियो से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच जारी मुद्दों पर चर्चा की है।
हालांकि H-1B वीजा शुल्क में वृद्धि से भारत समेत कई देशों को झटका लगा है, लेकिन डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को छूट मिलने की संभावना ने इस फैसले को संतुलित करने का प्रयास किया है। अब देखना यह होगा कि यह राहत कितनी व्यापक होती है और क्या इससे भारत को अमेरिका में पेश आ रही चुनौतियों से राहत मिलती है।

