नई दिल्ली, 23 सितम्बर (अशोक “अश्क”) पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच रणनीतिक रक्षा सहयोग को एक और नई ऊंचाई पर ले जाते हुए दोनों देशों ने साझा खुफिया तंत्र स्थापित करने का ऐलान किया है। यह कदम पिछले सप्ताह हुए रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते के बाद उठाया गया है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में आपसी समन्वय को मजबूत करना है।
नवीनतम समझौते के तहत इस्लामाबाद और रियाद के बीच एक खुफिया हॉटलाइन स्थापित की जाएगी, जिससे दोनों देश लगातार, वास्तविक समय पर खुफिया सूचनाएं साझा कर सकेंगे। इस प्रणाली के माध्यम से दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों, सैन्य कमांडरों और संवेदनशील व्यक्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी और संभावित खतरों से पहले ही आगाह किया जा सकेगा।

पाकिस्तान के शीर्ष सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, यह तंत्र न सिर्फ राजनीतिक, सैन्य और वैज्ञानिक हितों की रक्षा करेगा, बल्कि दोनों देशों की रक्षा साझेदारी को भी और गहरा करेगा। समझौते के तहत पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) और सऊदी अरब की जनरल इंटेलिजेंस प्रेसिडेंसी (GID) अपने-अपने मुख्यालयों में स्पेशल इंटेलिजेंस सेल्स बनाएंगी। इन सेल्स का मुख्य कार्य खुफिया जानकारी एकत्र करना, खतरे का आकलन करना और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए समन्वित कार्रवाई करना होगा।
इसके अलावा, दोनों देशों के खुफिया अधिकारियों के लिए संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, जिसमें डेटा शेयरिंग सिस्टम के साथ-साथ आतंकवाद-रोधी अभियानों के लिए अग्रिम चेतावनी जारी करने की प्रणाली भी विकसित की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह खुफिया सहयोग पाकिस्तान और सऊदी अरब की ऑपरेशनल क्षमता को और मजबूत करेगा और उन्हें क्षेत्रीय तथा वैश्विक खतरों से बेहतर तरीके से निपटने में मदद करेगा।
एक रिपोर्ट के अनुसार, इस रणनीतिक खुफिया साझेदारी को और मजबूती देने के लिए अगले महीने सऊदी अरब का एक उच्च स्तरीय रक्षा प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान का दौरा करेगा। इस दौरे का उद्देश्य समझौते की प्रगति की समीक्षा करना और खुफिया सहयोग से जुड़े ढांचे पर विस्तार से चर्चा करना होगा।
गौरतलब है कि हाल ही में हुए रक्षा समझौते में यह प्रावधान किया गया है कि यदि किसी एक देश पर हमला होता है, तो उसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। ऐसे में साझा खुफिया तंत्र इस रणनीतिक सहयोग को जमीन पर उतारने का एक अहम माध्यम साबित हो सकता है।

