नई दिल्ली, 27 सितंबर (अशोक “अश्क”) बिहार विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शनिवार को अररिया जिले के फारबिसगंज स्थित अर्द्ध-निर्मित हवाई पट्टी पर कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करेंगे। यह दौरा सिर्फ एक औपचारिक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सीमांचल की सियासत को नई दिशा देने वाली रणनीतिक चाल मानी जा रही है। शाह का यह दौरा न केवल भाजपा कार्यकर्ताओं में जोश भरेगा, बल्कि राज्य की राजनीतिक हवा को भी प्रभावित कर सकता है।

जिस स्थान पर कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित हो रहा है, वह ऐतिहासिक और सामरिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है। यही वह हवाई पट्टी है जहां 1973 में नेपाल की आंतरिक प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के पति दुर्गा प्रसाद सुवेदी और उनके साथियों ने नेपाल एयरलाइंस के विमान का अपहरण कर उसे उतारा था। उस समय यह कार्रवाई नेपाल में लोकतांत्रिक आंदोलन के आर्थिक समर्थन के लिए की गई थी। इसके अलावा 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के निर्देश पर इस पट्टी का इस्तेमाल सैनिक गतिविधियों के लिए भी किया गया था। तभी से इसे चालू करने की मांग लगातार उठती रही है।
भाजपा इस मौके को सीमांचल में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए एक बड़े अवसर के रूप में देख रही है। यह क्षेत्र मुस्लिम बहुल है और यहां लंबे समय से घुसपैठ का मुद्दा राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रहा है। हाल ही में एसआईआर मामलों ने इस बहस को और तेज किया है। ऐसे में भाजपा घुसपैठ, सीमा सुरक्षा, विकास और रोजगार जैसे मुद्दों को चुनावी एजेंडे में प्रमुखता देने की तैयारी में है।
अमित शाह का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी सीमांचल के चार दिवसीय दौरे पर हैं। ओवैसी जहां मुस्लिम वोट बैंक को साधने की कोशिश में हैं, वहीं शाह का दौरा भाजपा कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने और विपक्ष को कड़ा संदेश देने की रणनीति से जुड़ा है।
भारत-नेपाल सीमा पर हालिया तनाव और जैनजी आंदोलन के चलते व्यापारिक गतिविधियों पर पड़े असर को देखते हुए गृह मंत्री का यह दौरा भारत-नेपाल संबंधों में भरोसा बहाल करने और आंतरिक सुरक्षा की समीक्षा के नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शाह की सभा को लेकर सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है। एसएसबी और अन्य एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है। सीमा से सटे सभी थानों और बीओपी को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यह दौरा सीमांचल ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार में भाजपा की चुनावी रणनीति का टर्निंग पॉइंट बन सकता है।

