नई दिल्ली, 27 सितंबर 70( अशोक “अश्क”) अमेरिका के न्यू जर्सी राज्य के गवर्नर और डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ नेता फिल मर्फी ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों और वीजा नीतियों पर अपनी बेबाक राय रखी है। अपनी भारत यात्रा के दौरान मर्फी ने कहा कि अमेरिका की पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति ने भारत जैसे सहयोगी देशों के साथ रिश्तों को नुकसान पहुंचाया है।
एक इंटरव्यू के दौरान मर्फी ने उम्मीद जताई कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में 50% टैरिफ पर कोई न कोई समाधान जरूर निकलेगा। उन्होंने संकेत दिए कि इस समाधान में तेल व्यापार को लेकर कोई बड़ा समझौता भी शामिल हो सकता है।

गौरतलब है कि हाल ही में अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 25% दंडात्मक टैरिफ लगा दिया था। वहीं भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि आने वाले वर्षों में अमेरिका भारत की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मर्फी ने ट्रंप की रूस विरोधी नीति का समर्थन करते हुए कहा, “रूस को ज़िम्मेदार ठहराना ज़रूरी है, लेकिन सहयोगी देशों पर भारी टैरिफ थोपना समाधान नहीं है।” चीन पर बोलते हुए उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि चीन को किसी हाल में बख्शा नहीं जाना चाहिए।
H-1B और छात्र वीजा नीतियों पर भी मर्फी ने चिंता जताई। उन्होंने कहा, “H-1B प्रोग्राम को सीमित करना गलत होगा। अमेरिका को वैश्विक प्रतिभाओं की ज़रूरत है और भारतीय पेशेवर इसमें अहम भूमिका निभाते हैं।” उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा नीतियों के चलते भारतीय छात्रों की संख्या घट सकती है और वे कनाडा, यूके जैसे विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं।
गवर्नर मर्फी ने सुझाव दिया कि अमेरिकी विश्वविद्यालय भारत में 1+3 या 2+2 मॉडल के तहत साझेदारी कर सकते हैं ताकि शैक्षणिक और सांस्कृतिक संबंध मज़बूत हों।
मर्फी ने भरोसा जताया कि भारत-अमेरिका संबंधों में आई दरारें अस्थायी हैं। उन्होंने कहा, “भरोसा फिर से कायम करना आसान नहीं होगा, लेकिन मैं आशावादी हूं। भारत और अमेरिका के रिश्तों को संभाला जा सकता है।”

