नई दिल्ली, 28 सितंबर (अशोक “अश्क”) दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम आज एक ऐतिहासिक मुकाबले का गवाह बनने जा रहा है, जहां भारत और पाकिस्तान 41 साल बाद पहली बार एशिया कप फाइनल में आमने-सामने होंगे। क्रिकेट के दो सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी आज सिर्फ ट्रॉफी नहीं, बल्कि गौरव, आत्मसम्मान और राष्ट्रीय सम्मान के लिए भिड़ेंगे।

भारत टूर्नामेंट में अब तक अजेय रहा है और सुपर-4 में पाकिस्तान को मात भी दे चुका है। कप्तान सूर्यकुमार यादव और कोच गौतम गंभीर के सामने अब तक की सबसे बड़ी चुनौती है फाइनल में भी वही प्रदर्शन दोहराने की। वहीं पाकिस्तान संघर्ष करता हुआ फाइनल तक पहुंचा है, लेकिन इतिहास गवाह है कि फाइनल में उसका रिकॉर्ड भारत से बेहतर रहा है।
अब तक दोनों टीमें 12 बार आईसीसी और एशियाई फाइनल में टकरा चुकी हैं, जिसमें पाकिस्तान ने आठ बार जीत हासिल की है, जबकि भारत सिर्फ चार बार विजयी हुआ है। टी20 फॉर्मेट में हालांकि भारत ने 2007 वर्ल्ड कप फाइनल में बाज़ी मारी थी।
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता है टीम का अभिषेक शर्मा पर अत्यधिक निर्भर होना। छह मैचों में 309 रन बनाकर अभिषेक ने भारतीय बल्लेबाजी को संभाला है, लेकिन बाकी बल्लेबाजों शुभमन गिल, संजू सैमसन और तिलक वर्मा का प्रदर्शन अस्थिर रहा है। शुभमन फिनिश नहीं कर पा रहे, वहीं सैमसन और वर्मा सिर्फ औपचारिक मुकाबलों में ही चले हैं। अगर अभिषेक असफल रहे, तो भारत के पास ‘प्लान बी’ की कमी है।
गेंदबाजी में कुलदीप यादव और वरुण चक्रवर्ती भारत की उम्मीदों के केंद्र में हैं। पाकिस्तान की बल्लेबाजी कमजोर दिखी है फरहान को छोड़ बाकी खिलाड़ी भारतीय स्पिन के सामने बेबस नजर आए हैं। सैम अयूब का निराशाजनक प्रदर्शन और सलमान अली आगा की असफलता पाकिस्तान की चिंता बढ़ा रही है।
पाकिस्तान की ताकत उसके तेज़ गेंदबाज़ शाहीन शाह अफरीदी और हारिस रऊफ हैं। अगर वे भारत के शीर्ष क्रम को जल्दी तोड़ते हैं, तो मुकाबला लो-स्कोरिंग हो सकता है। लेकिन इन दोनों को सपोर्ट करने वाला गेंदबाज़ न होना पाकिस्तान के लिए जोखिम बन सकता है।
राजनीतिक और कूटनीतिक तनाव के बीच हो रहा यह मुकाबला केवल खेल नहीं, बल्कि एक भावनात्मक संग्राम है। पाकिस्तानी मंत्री मोहसिन नकवी की भड़काऊ टिप्पणियों और मैदान के बाहर की बयानबाज़ी ने मुकाबले को और भी उग्र बना दिया है।
भारत के लिए आज का दिन सिर्फ जीत का नहीं, बल्कि एक संदेश देने का है कि वह फॉर्म, फिटनेस और फोकस तीनों में पाकिस्तान से आगे है। और पाकिस्तान के लिए यह मौका है इतिहास को दोहराने का।
अब गेंद खिलाड़ियों के पाले में है। एक देश जश्न मनाएगा, दूसरा मायूस होगा। कौन रचेगा इतिहास? जवाब आज शाम मिलेगा।

