नई दिल्ली, 2 अक्टूबर (अशोक “अश्क”) भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष 3 अक्टूबर को पूरे हो रहे हैं। इस मौके पर द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिसंबर की शुरुआत में भारत दौरे पर आएंगे। इस दौरान वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, जहां रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा होगी।

सूत्रों के अनुसार, पुतिन की यह बहुप्रतीक्षित यात्रा 5 दिसंबर के आसपास प्रस्तावित है, हालांकि तारीख और अवधि को लेकर अंतिम निर्णय अभी नहीं लिया गया है। यह यात्रा कई मायनों में अहम है, क्योंकि यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह पुतिन की पहली भारत यात्रा होगी। वे आखिरी बार 2021 में वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए भारत आए थे।
दोनों देशों के नेताओं की आखिरी मुलाकात सितंबर में चीन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। तब दोनों नेताओं ने रणनीतिक साझेदारी को और गहराने के संकल्प को दोहराया था। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में कहा था कि भारत और रूस ने हमेशा कठिन परिस्थितियों में एक-दूसरे का साथ निभाया है।
पुतिन की यात्रा से पहले रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव नवंबर में और रक्षा मंत्री आंद्रे बेलोउसॉव सितंबर के अंत में भारत आएंगे। बेलोउसॉव की यात्रा के दौरान भारत-रूस अंतर-सरकारी सैन्य तकनीकी सहयोग आयोग (IRIGC-MTC) की बैठक होगी, जो दोनों देशों के रक्षा संबंधों की प्रमुख संस्था है।
सूत्रों ने बताया कि इस बार पुतिन भारत दौरे के दौरान न केवल मोदी से मुलाकात करेंगे, बल्कि रूसी सरकारी प्रसारक RT के भारत चैनल का उद्घाटन भी करेंगे। यह कदम भारत में रूस की मीडिया पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
व्यापार के मोर्चे पर भी दोनों देशों के संबंध नई ऊंचाई पर हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत-रूस द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड 68.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। हालांकि, इसमें भारत का निर्यात महज 4.88 अरब डॉलर रहा है, जबकि अधिकांश व्यापार रियायती दरों पर रूस से खरीदे गए कच्चे तेल पर आधारित है। इस असंतुलन को संतुलित करने और भारतीय कंपनियों को रूसी बाजार में अधिक पहुंच दिलाने पर बातचीत होने की संभावना है।
भारत पर अमेरिका द्वारा रूस से ऊर्जा और रक्षा उपकरणों की खरीद कम करने का दबाव लगातार बना हुआ है, ऐसे में पुतिन की यह यात्रा वैश्विक कूटनीतिक संतुलन के लिहाज से भी बेहद अहम मानी जा रही है।

