नई दिल्ली, 4 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) पाक अधिकृत कश्मीर में बीते कुछ समय से जारी प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं, जिससे पाकिस्तान सरकार की चिंता बढ़ गई है। अब तक हुई हिंसा में 12 लोगों की मौत हो चुकी है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। पीओके के राजनीतिक दलों ने अब खुलकर पाकिस्तानी सेना और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से भी इस मामले में दखल देने की अपील की गई है।

इन घटनाओं के चलते लोगों में एक बार फिर पीओके को लेकर जिज्ञासा बढ़ी है, खासकर यहां की जनसंख्या और धार्मिक संरचना को लेकर। भारत हमेशा से पाक अधिकृत कश्मीर को अपना हिस्सा मानता रहा है, जबकि फिलहाल यह पाकिस्तान के कब्जे में है।
इस क्षेत्र की कुल आबादी लगभग 45 लाख के आसपास है, जिसमें मुस्लिम आबादी का अनुपात सबसे अधिक है। पाकिस्तान सरकार और सेना की नीतियों के कारण यहां रह रहे लोगों पर कई तरह की पाबंदियाँ लगी रहती हैं और वे लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों से वंचित हैं। यही कारण है कि पीओके के लोग समय-समय पर पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन करते हैं।
जोशुआ प्रोजेक्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार पीओके में हिंदू आबादी 0.5% से भी कम है, यानी यहां हिंदुओं की संख्या बेहद नगण्य है।
पीओके करीब 13,000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ क्षेत्र है, जो प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत है, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता और आतंकवादी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जाने के कारण यह इलाका संवेदनशील बना हुआ है। पाकिस्तान अक्सर इस क्षेत्र का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों और आतंकी ठिकानों के रूप में करता रहा है।
स्थिति को देखते हुए आने वाले दिनों में यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और अधिक तूल पकड़ सकता है।

