नई दिल्ली, 4 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक रिश्तों में जारी तनाव के बीच अमेरिकी ट्रंप प्रशासन की ओर से एक नरम और महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा है कि भारत एक संप्रभु राष्ट्र है और उसे अपने फैसले लेने का पूरा अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका भारत को किसी अन्य देश से उसके संबंधों के लिए निर्देश नहीं दे सकता।

ग्रीर ने यह बयान न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित इकोनॉमिक क्लब में दिया। उन्होंने कहा, “हम भारत को यह नहीं बता सकते कि उसे किन देशों के साथ संबंध रखने हैं। भारत एक व्यावहारिक देश है और मुझे लगता है कि वह पहले से ही रूसी तेल से दूरी बना रहा है। भारत धीरे-धीरे रूसी ऊर्जा स्रोतों पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल के वर्षों में अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक और भू-राजनीतिक तनाव काफी बढ़ा है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने भारत से आने वाले कई उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक का टैरिफ लगा दिया है। साथ ही, रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर अमेरिका भारत पर निरंतर दबाव बनाता रहा है। हालांकि, भारत ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा।
इस मुद्दे पर रूस भी खुलकर सामने आया है। हाल ही में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि भारत और चीन पर रूस से व्यापार तोड़ने का अमेरिकी दबाव आर्थिक रूप से नुकसानदेह हो सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर भारत रूस से अपने व्यापारिक रिश्ते खत्म करता है, तो उसे न केवल आर्थिक, बल्कि घरेलू राजनीतिक मोर्चे पर भी नुकसान उठाना पड़ेगा।
ग्रीर का यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि ट्रंप प्रशासन की अब तक की नीति भारत पर दबाव बनाने वाली रही है। खुद राष्ट्रपति ट्रंप और उनके कई वरिष्ठ अधिकारी भारत के रूस के साथ बढ़ते संबंधों को लेकर तीखी टिप्पणियां कर चुके हैं। ऐसे में ग्रीर का यह नरम रवैया अमेरिकी नीति में संभावित बदलाव की ओर संकेत करता है।
विश्लेषकों का मानना है कि जैमीसन ग्रीर की टिप्पणी ट्रंप प्रशासन के भीतर भी सोच में बदलाव को दर्शाती है। यह बयान यह भी स्पष्ट करता है कि अमेरिका अब भारत के आत्मनिर्णय के अधिकार को अधिक गंभीरता से लेने लगा है।
कुल मिलाकर, ग्रीर का यह बयान भारत-अमेरिका संबंधों में नई सोच और संभावित लचीलापन लाने वाला संकेत माना जा रहा है, खासकर रूस जैसे संवेदनशील मुद्दों पर। अब देखना यह है कि इस बयान के बाद दोनों देशों के रिश्तों में किस तरह का नया मोड़ आता है।

