नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (अशोक “अश्क “) तालिबान शासित अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी की भारत यात्रा से पहले भारत सरकार एक जटिल कूटनीतिक संकट का सामना कर रही है। शुक्रवार को मुत्तकी की विदेश मंत्री एस. जयशंकर से संभावित मुलाकात के दौरान सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या तालिबान का झंडा भारतीय तिरंगे के साथ फहराया जाएगा या नहीं।

भारत ने अब तक तालिबान सरकार को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है। यही वजह है कि नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास में आज भी पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी के नेतृत्व वाले इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ अफगानिस्तान का झंडा लहराता है। भारत ने तालिबान को कूटनीतिक रूप से मान्यता न देते हुए अब तक अफगानिस्तान में सत्ता परिवर्तन को औपचारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया है।
हालांकि मुत्तकी की भारत यात्रा कई महीनों से चर्चा में थी, लेकिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से उन्हें इस दौरे के लिए विशेष अनुमति हाल ही में मिली है। मुत्तकी UNSC के Resolution 1988 (2011) के तहत प्रतिबंधित व्यक्तियों की सूची में शामिल हैं, और इसलिए भारत आने के लिए उन्हें विशेष छूट की आवश्यकता थी। 9 से 16 अक्टूबर तक की इस यात्रा को पहले सितंबर में आयोजित करने का प्रयास किया गया था, लेकिन तब UNSC समिति से मंजूरी नहीं मिल सकी थी।
अब जबकि मुत्तकी की दिल्ली यात्रा तय हो चुकी है, विदेश मंत्रालय के लिए यह तय करना मुश्किल हो गया है कि मुलाकात के दौरान प्रोटोकॉल के तहत तालिबान का झंडा लगाया जाए या नहीं। आम तौर पर किसी भी आधिकारिक वार्ता में दोनों देशों के झंडे या तो मेज पर रखे जाते हैं या फिर पृष्ठभूमि में लगाए जाते हैं। लेकिन चूंकि भारत ने तालिबान को मान्यता नहीं दी है, इसलिए यह एक असामान्य स्थिति बन गई है।
पिछले उदाहरणों से संकेत मिलता है कि भारत इस मामले में काफी सावधानी बरतता रहा है। जब काबुल में भारतीय अधिकारियों और मुत्तकी के बीच बैठक हुई थी, तब पृष्ठभूमि में तालिबान का झंडा मौजूद था। इसी तरह जनवरी में दुबई में हुई एक बैठक में भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी और मुत्तकी के बीच मुलाकात के दौरान दोनों देशों के झंडे नहीं लगाए गए थे।
अब जब यह बैठक दिल्ली में हो रही है, तो भारत के सामने यह स्पष्ट कूटनीतिक चुनौती है एक ऐसे प्रतिनिधि का स्वागत करना, जो आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त नहीं है, और फिर भी उच्च स्तरीय वार्ता का हिस्सा बन रहा है।
इस बीच, विदेश मंत्रालय की ओर से मुत्तकी की यात्रा पर कोई आधिकारिक बयान अब तक जारी नहीं किया गया है, जिससे अटकलों का दौर और तेज हो गया है।

