पटना, 9 अक्तूबर (सेंट्रल डेस्क) राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने हाल में एक बड़ा चुनावी वादा करते हुए कहा है कि यदि महागठबंधन की सरकार बनेगी तो बिहार के प्रत्येक घर के कम से कम एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि शपथ ग्रहण के बीस दिनों के भीतर इस नीति को लागू करने हेतु आवश्यक कानून बनाया जाएगा और यह कार्यक्रम बीस माह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। तेजस्वी की इस घोषणा के बाद सियासत गर्मा गई है और विरोधी दलों ने तीखी टिप्पणियाँ शुरू कर दी हैं।

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता नीरज कुमार ने तेजस्वी के बयान पर तंज कसते हुए सवाल उठाया कि नौकरी के बदले हर घर से कितनी जमीन ली जाएगी। उन्होंने राजद पर पुराने “लैंड फॉर जॉब” मामले की याद दिलाई जिसमें पार्टी के कुछ नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई थी और कहा कि शेर कभी शाकाहारी नहीं होता। नीरज कुमार ने एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि अगर इनकी सरकार बनी तो हर गांव में “अपहरण उद्योग” का विस्तार होगा और राज्य की जनता उनके वायदों पर भरोसा नहीं करती।
वहीं जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने भी तेजस्वी की घोषणा पर व्यंग्य किया और कहा कि लालू परिवार की राजनीतिक परिस्थितियाँ और कारावास के वर्षों के बाद तेजस्वी का “ज्ञान” कैद के समान हो गया है। उन्होंने यह भी पूछा कि यह कौन सा नया कानून होगा जिसमें केवल हर घर का एक सदस्य ही सरकारी नौकरी पाने का हकदार होगा। उनका तर्क था कि योग्यता के आधार पर एक ही परिवार के कई सदस्य सरकारी सेवाओं में जा सकते हैं और किसी को इस तरह का प्रतिबंध न तो संविधान देता है और न ही प्रशासनिक प्रक्रिया अनुमति देगी।
राजद के समर्थकों ने वादे को बेरोजगारी निवारण की दिशा में महत्वपूर्न प्रयास बताया है और तर्क दिया कि व्यापक सामाजिक सुरक्षा और रोजगार गारंटी पर केंद्रित योजनाएँ राज्य के विकास में सहायक होंगी। अब राजनीतिक बहस और प्रतिपक्ष की टिप्पणियाँ आगे तेज होंगी।
आगामी सप्ताहों में दोनों पक्ष कई सार्वजनिक सभाएँ और कार्यक्रम आयोजित करेंगे जहाँ यह मुद्दा उभरेगा। विश्लेषक कहते हैं कि रोजगार वादे पर गंभीर वित्तीय योजना, बजटीय प्रावधान तथा ठोस क्रियान्वयन रोडमैप आवश्यक होगा। बिना इन घटकों के वादा विवादों और नियामक सवालों को जन्म दे सकता है। जल्दी जनता निर्णय लेगी।

