नई दिल्ली, 10 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) बेनि साफ़दी निर्देशित द स्मैशिंग मशीन आज भारतीय सिनेमा घरों में रिलीज़ हो गई है। फिल्म की कहानी एक सच्ची घटना पर आधारित फिल्म है, जो प्रसिद्ध MMA फाइटर मार्क केर की जटिल और दर्दभरी ज़िंदगी को संवेदनशीलता और सच्चाई के साथ दर्शाती है। यह कोई पारंपरिक स्पोर्ट्स फिल्म नहीं है, न यह प्रेरणा से भरी हुई “अंडरडॉग” की कहानी है और न ही किसी विजयी क्लाइमेक्स का दावा करती है। बल्कि, यह फिल्म हार, खोखलेपन और आत्म-अवमूल्यन की सच्ची तस्वीर को उकेरती जिंदगी की सच्चाई है।

ड्वेन जॉनसन, जिन्हें आमतौर पर एक्शन और कॉमेडी भूमिकाओं में देखा गया है, यहां अपने करियर का सबसे गंभीर और गहन अभिनय करते हैं। वे मार्क केर की भूमिका में पूरी तरह ढल गए हैं, एक ऐसा योद्धा जो रिंग में जितना ताक़तवर है, निजी जीवन में उतना ही टूट चुका है। नशे की लत, आत्म-संदेह, और असफल रिश्ते उनके किरदार की परतें खोलते हैं, और ड्वेन जॉनसन इन सभी भावनाओं को एकदम वास्तविक बनाते हैं।
एमिली ब्लंट ने केर की प्रेमिका और पत्नी के रूप में जबरदस्त प्रदर्शन किया है। उनका किरदार न तो पूरी तरह सहायक है और न ही सिर्फ एक पीड़िता। वह एक ऐसे रिश्ते का चेहरा हैं जो प्रेम, निर्भरता और विषाक्तता के बीच झूलता रहता है। उनका अभिनय इस फिल्म को और अधिक गहराई देता है।
फिल्म का निर्देशन और तकनीकी पक्ष भी बेहद प्रभावशाली है। बेनि साफ़दी ने डॉक्यूमेंट्री शैली में इसे पेश किया है। क्लोज़-अप शॉट्स, न्यूनतम बैकग्राउंड स्कोर और यथार्थवादी साउंड डिज़ाइन इसे सच्चा अनुभव बनाते हैं। कुछ दर्शकों को इसकी धीमी गति और निराशाजनक टोन खल सकती है, लेकिन यही इसके प्रभाव की असली ताक़त है।
द स्मैशिंग मशीन सिर्फ एक फाइटर की कहानी नहीं है, यह उन अनगिनत लोगों की आवाज़ है जो अपने अंदरूनी द्वंद्वों से लड़ते हैं। यह फिल्म सन्नाटे में एक खामोश गूंज है , लेकिन देर तक असर छोड़ने वाली। अगर फिल्म के रेटिंग की बात करें तो फिल्म को 3.5 स्टार्स मिलने चाहिए
~ अशोक “अश्क”

