‘चोली के पीछे क्या है’ गाने से मच गया था बवाल, एक हफ्ते में बिके थे 1 करोड़ ऑडियो कैसेट
नई दिल्ली, 15 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) फिल्म का गीत-संगीत किसी भी फिल्म की सफलता की नींव होता है। 1993 में आई सुभाष घई की फिल्म ‘खलनायक’ इसका सटीक उदाहरण है। इस फिल्म के गाने ‘चोली के पीछे क्या है’ ने न सिर्फ तहलका मचाया, बल्कि यह हिंदी सिनेमा में विवाद और लोकप्रियता का बेजोड़ मेल बन गया। रिलीज के पहले ही हफ्ते में इस गाने के 1 करोड़ ऑडियो कैसेट बिक गए थे।

सुभाष घई ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि गीतकार आनंद बख्शी ने जब उन्हें फोन पर गाने की पहली लाइन सुनाई – ‘चोली के पीछे क्या है’, तो घई के हाथ से पेन गिर गया। लेकिन बख्शी ने आगे कहा, ‘चोली में दिल है मेरा, यह दिल मैं दूंगी अपने यार को, प्यार को’ – और बस वहीं से तय हो गया कि यह गाना फिल्म का हिस्सा बनेगा।
इस गाने का मेल वर्जन भी फिल्म में रखा गया था, जिसमें संजय दत्त ने डांस किया। घाघरा-चोली पहनकर और मुंह पर चुनरी डालकर किया गया उनका यह परफॉर्मेंस आज भी आइकॉनिक माना जाता है।

गाने की गायिका अल्का याज्ञनिक ने एक प्रोग्राम में मजाक में कहा, “इस गाने में मेरी कोई गलती नहीं है, इला अरुण की गलती है। मैंने तो दिल से गाया।” वहीं इला अरुण की अनोखी आवाज़ ने गाने को और भी खास बना दिया।
फिल्म की मार्केटिंग उस वक्त खुद ही बन गई जब संजय दत्त को बम ब्लास्ट केस में जेल जाना पड़ा। गाने पर उठा विवाद, प्रदर्शन और बैन की मांग – इन सबने फिल्म को सुर्खियों में ला दिया। प्रमोशन की जरूरत ही नहीं पड़ी।
6 अगस्त 1993 को रिलीज हुई इस फिल्म ने 24 करोड़ की कमाई की और साल की दूसरी सबसे बड़ी फिल्म बनी। ‘नायक नहीं खलनायक हूं मैं’ जैसे गानों और संजय दत्त के निगेटिव किरदार ने दर्शकों का दिल जीत लिया।
‘खलनायक’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, एक दौर का नाम बन गया।

