नई दिल्ली, 21 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) मैडॉक फिल्म्स की हॉरर कॉमेडी ‘थामा’ आज सिनेमाघरों में रिलीज़ हो है, ये फिल्म भारतीय सिनेमा के हॉरर जॉनर को एक नया आयाम देती है। ‘स्त्री’ ‘मुंज्या’ और ‘भेड़िया’ जैसी फिल्मों के बाद थामा इस यूनिवर्स का अब तक का सबसे गहरा और भावनात्मक विस्तार बनकर सामने आती है।

निर्देशक आदित्य सरपोतदार ने फिल्म को सिर्फ डराने वाली कहानी नहीं बनाया, बल्कि इसे एक समृद्ध फैंटेसी वर्ल्ड में तब्दील कर दिया है, जहां रहस्य, प्राचीन शक्तियाँ और इंसानी रिश्तों की परतें साथ-साथ चलती हैं। फिल्म की शुरुआत एक रहस्यमयी जंगल से होती है, जहां सदियों पुरानी मान्यताएं अब भी जीवित हैं।
फिल्म का नायक आयुष्मान खुराना ने ‘आलोक’ नाम के पत्रकार की भूमिका में शानदार परफॉर्मेंस दी है। शुरुआत में मज़ाकिया और साधारण लगने वाला किरदार एक अलौकिक घटना के बाद गंभीर और भावनात्मक हो जाता है, जिसे आयुष्मान ने बेहतरीन ढंग से निभाया है।
रश्मिका मंदाना इस फिल्म का इमोशनल बैकबोन हैं। उनके किरदार में सादगी और शक्ति का ऐसा संतुलन है, जो दर्शकों को गहराई से जोड़ता है। वहीं नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी का रहस्यमयी किरदार इस यूनिवर्स में एक नई दिशा की ओर इशारा करता है।
परेश रावल अपने चिर-परिचित अंदाज़ में ह्यूमर लाते हैं, लेकिन उनका किरदार सिर्फ मज़ाक तक सीमित नहीं रहता। सत्यराज, ‘एल्विस’ के रूप में, फिल्म को ‘स्त्री 2’ से जोड़ते हैं और उनकी मौजूदगी फिल्म की दिशा बदलती है।
नोरा फतेही का कैमियो छोटा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण है उनके किरदार में ग्लैमर से हटकर भावनात्मक और रहस्य से जुड़ा कनेक्शन है।
फिल्म का दूसरा भाग तकनीकी रूप से दमदार है, शानदार VFX, सिनेमैटोग्राफी और साउंड डिज़ाइन इसे एक विज़ुअल ट्रीट बनाते हैं। आलोक और भेड़िया (वरुण धवन) की भिड़ंत फिल्म का टर्निंग पॉइंट है, जो केवल एक्शन नहीं, बल्कि यूनिवर्स बिल्डिंग को भी आगे बढ़ाता है।
कहानी, संवाद और संगीत तीनों ही फिल्म की मजबूती हैं। कोई भी गाना गैरज़रूरी नहीं लगता और स्क्रिप्ट (निरेन भट्ट, सुरेश मैथ्यू, अरुण फलारा) दर्शकों को शुरू से अंत तक बांधे रखती है। अगर फिल्म के रेटिंग की बात करें तो फिल्म को 3.5 स्टार्स मिलने चाहिए |

