नई दिल्ली, 25 अक्टूबर (अशोक “अश्क”) बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस ने बड़ा फैसला लिया है। पार्टी ने वरिष्ठ और अनुभवी नेता अविनाश पांडेय को बिहार चुनाव की रणनीति और संगठनात्मक समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी है। यह कदम पार्टी में हालिया घमासान और टिकट विवाद के बीच चर्चा का केंद्र बन गया है।

बिहार कांग्रेस में टिकट को लेकर चल रहे विवाद और दो सीटों की गंवाया जाना पार्टी के लिए चिंता का विषय बना था। कई नेताओं ने टिकट वितरण में पैसों के लेन-देन का आरोप लगाया और कुछ ने इस्तीफा भी दे दिया। माना जा रहा है कि राज्य प्रभारी कृष्णा अल्लावरु इस स्थिति को संभालने में असफल रहे, जिसके बाद पार्टी आलाकमान ने अविनाश पांडेय को बड़ा टास्क सौंपा।
अविनाश पांडेय ने अपने बिहार आगमन की जानकारी एक्स पर साझा करते हुए लिखा कि वे आगामी चुनावों के लिए संगठनात्मक समन्वय और रणनीति निर्माण का काम करेंगे। उन्होंने कहा कि यह केवल चुनाव नहीं, बल्कि बिहार की दिशा और दशा तय करने वाला निर्णायक अवसर है। उनका मानना है कि एनडीए सरकार ने राज्य को बेरोज़गारी, पलायन और विकासहीनता की ओर धकेला है और अब जनता बदलाव के लिए तैयार है।
अविनाश पांडेय नागपुर के मूल निवासी हैं। वे देश के जाने-माने वकील रह चुके हैं, महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य और 2010 में राज्य सभा सांसद भी चुने गए थे। राहुल गांधी ने 2023 में उन्हें यूपी प्रभारी महासचिव बनाया था। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस-सपा गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन किया था।
शनिवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए अविनाश पांडेय ने केंद्र सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि छठ महापर्व के दौरान बिहार के लोगों का अपमान हुआ है। देश में कुल 13 हजार रेलगाड़ियां हैं, जबकि पीएम नरेंद्र मोदी 12 हजार विशेष ट्रेन चलाने का दावा करते हैं। पांडेय ने कहा कि लोग रेलगाड़ियों में शौचालय तक में यात्रा करने को मजबूर हैं और प्रधानमंत्री को इस झूठ के लिए बिहार से माफी मांगनी चाहिए।

