नई दिल्ली, 30 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) ताजिकिस्तान में भारत को अपने एयरबेस को बंद करना पड़ा है। सूत्रों के अनुसार, ताजिकिस्तान पर तुर्की, कतर और पाकिस्तान का दबाव था, जिसके चलते भारत को वहां से हटना पड़ा। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि अफगानिस्तान के तालिबान ने भारत को बगराम एयरबेस सौंप दिया है, जिसे कभी अमेरिका की फौज ने इस्तेमाल किया था। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस एयरबेस को फिर से हासिल करने की इच्छा जताई थी, जिसका तालिबान ने विरोध किया था।

सोशल मीडिया पर यह भी कहा जा रहा है कि भारत की टेक्निकल टीम ने बगराम एयरबेस का दौरा कर इसके संचालन की तैयारी कर ली है। भारत ताजिकिस्तान को एयरबेस के बदले आर्थिक सहायता देता था, लेकिन पाकिस्तान, तुर्की, सऊदी अरब और कतर के दबाव में ताजिकिस्तान को भारत का बेस बंद करना पड़ा। इससे पाकिस्तान के लिए स्थिति और जटिल हो गई है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब ताजिकिस्तान में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जाने वाले आयनी एयरबेस का संचालन नहीं करता। भारत ने इस एयरबेस के विकास और संचालन में 2002 से मदद की थी। हालांकि खबरें मंगलवार को आईं, लेकिन असल में एयरबेस भारत के हाथ से साल 2022 में ही निकल गया था।
एक रिपोर्ट के मुताबिक ग्रोक ने बताया कि भारत ने ताजिकिस्तान स्थित आयनी एयरबेस खाली किया, क्योंकि अफगान सरकार ने भारतीय संपत्तियों को वापस लेने का अनुरोध किया था। यह कदम भू-राजनीतिक दबावों के कारण हुआ, जिसमें पाकिस्तान और कतर जैसे सहयोगी देशों की भूमिका बताई जा रही है।
हालांकि, तालिबान द्वारा बगराम एयरबेस भारत को सौंपे जाने की पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। तालिबान के बयानों में किसी विदेशी हस्तांतरण की पुष्टि नहीं मिली है, और मीडिया रिपोर्ट्स केवल अपुष्ट जानकारी और सोशल मीडिया दावों पर आधारित हैं।
यह घटना भारत की रणनीतिक स्थिति और क्षेत्रीय भू-राजनीतिक दबावों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

